
मंजू शर्मा ‘मनस्विनी’
वो दिन कितने अच्छे थे,
जब तुम छोटे बच्चे थे।
खेल-खेल में हँसते आते,
झट मेरी गोदी चढ़ जाते।
मिट्टी से रंग लेते गाल,
मुस्कान लगती बिखरे गुलाल।
गले लगाकर झूला झूलें,
लाड़-प्यार के मोती फूलें।
दौड़–दौड़ कर थक जाते,
फिर बाहों में सो भी जाते।
कितने प्यारे थे वो दिन
खुशियां खिली थी प्रतिदिन
आज भी मन को हैं बहलाती,
गुजरे दिनों की कहानी कहती।
बहुत सुंदर भाव व सृजन 👌👌🌹