कुर्बानी

आँवले के उस पुराने पेड़ के नीचे जहाँ कभी उनका प्यार अंकुरित हुआ था, आज सीमा और अर्जुन फिर चुपचाप बैठे थे। वक्त बहुत बदल चुका था, पर भावनाएँ नहीं। सीमा का दिल अर्जुन के बिना किसी और को स्वीकार नहीं कर पा रहा था, जबकि अर्जुन अपनी भावनाओं को दबाकर उसे उसके माता-पिता के सपनों को पूरा करने की राह दिखा रहा था।
उसकी आँखों में छिपा दर्द साफ़ था. अपने प्यार को खोने का नहीं, बल्कि सीमा की खुशियाँ बचाने का। किसी और की भलाई के लिए दिल को चीर देना वही उसकी सबसे बड़ी कुर्बानी थी।

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मासूम मुस्कानें

वो दिन कितने सुहाने थे. जब तुम छोटे-से बच्चे थे। खेलते–कूदते हुए हँसते-हँसते मेरी गोदी में चढ़ आते और मिट्टी में खेलकर अपने गालों पर रंग-सा बिखेर लेते। तुम्हारी वह मुस्कान मानो चारों ओर गुलाल-सी छा जाती। मैं तुम्हें गले लगाकर झूला झुलाती, और तुम्हारे लाड़-प्यार से घर में मानो खुशियों के मोती बिखर जाते। दौड़ते-दौड़ते जब तुम थककर मेरी बाँहों में सो जाते, तो लगता जैसे दुनिया की सारी शांति मुझे मिल गई हो।

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