
हेमा जोशी स्वाति, लोहाघाट, उत्तराखंड
असुरों का विनाश किया,देव हुए भय मुक्त।
ऋषि मुनी जप ध्यान करें,होकर के उन्मुक्त।।
देव बजावें दुंदुभी, करें अप्सरा गान।
रावण मारे हैं प्रभू,मरे निशाचर जान।।
विजय ध्वजा फहराय के, दिया विभीषण राज।
लौटे हैं बनवास से , राम अयोध्या आज।।
मातु उतारें आरती, पुष्पों की बौछार।
आई बेला मिलन की,नाच रहे नर नार।।