रामायण गाथा : धर्म की विजय

यह पद्यांश रामायण की मुख्य घटनाओं का संक्षिप्त और भावपूर्ण चित्रण करता है। इसमें वर्णन है कि दशरथ के प्रिय पुत्र श्रीराम ने पिताजी की आज्ञा का पालन करते हुए राजपाट त्यागकर सीता और लक्ष्मण के साथ वनगमन किया। स्वर्ण मृग की माया से सीता का हरण रावण ने साधु का वेश धरकर किया, जिसके बाद श्रीराम और लक्ष्मण व्याकुल होकर वन-वन सीता की खोज में निकले।

मार्ग में घायल जटायू मिले, जिन्होंने अपने प्राण त्यागकर सीता हरण का समाचार दिया। आगे चलकर श्रीराम को हनुमान, सुग्रीव और वानर सेना का सहयोग मिला। हनुमान ने सीता को खोजकर उनकी निशानी अंगूठी पहुँचाई और लंका दहन किया। नल-नील की सहायता से समुद्र पर सेतु का निर्माण कर श्रीराम की सेना लंका पहुँची। वहाँ भीषण युद्ध हुआ, जिसमें रावण का वध कर धर्म की विजय स्थापित की गई। अंततः देवताओं और ऋषियों ने प्रभु राम का गुणगान किया और उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में वंदित किया।

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दशहरा पर्व

दशहरा का पर्व असुरों के विनाश और धर्म की विजय का प्रतीक है। जब रावण का अंत हुआ, तब देवता भयमुक्त होकर उल्लास से दुंदुभियाँ बजाने लगे और अप्सराएँ गान करने लगीं। ऋषि-मुनि अपने जप और ध्यान में और अधिक एकाग्र होकर उन्मुक्त हो उठे। विभीषण को लंका का राज्य देकर भगवान राम अपने वनवास का अंत कर अयोध्या लौटे। नगरवासियों ने विजयध्वजा फहराई, माता सीता की आरती उतारी और पुष्पों की बौछार की। उस बेला में मिलन और उल्लास का ऐसा वातावरण बना कि नर-नारी आनंद में झूमकर नृत्य करने लगे।

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