Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

दशहरा पर्व

दशहरा का पर्व असुरों के विनाश और धर्म की विजय का प्रतीक है। जब रावण का अंत हुआ, तब देवता भयमुक्त होकर उल्लास से दुंदुभियाँ बजाने लगे और अप्सराएँ गान करने लगीं। ऋषि-मुनि अपने जप और ध्यान में और अधिक एकाग्र होकर उन्मुक्त हो उठे। विभीषण को लंका का राज्य देकर भगवान राम अपने वनवास का अंत कर अयोध्या लौटे। नगरवासियों ने विजयध्वजा फहराई, माता सीता की आरती उतारी और पुष्पों की बौछार की। उस बेला में मिलन और उल्लास का ऐसा वातावरण बना कि नर-नारी आनंद में झूमकर नृत्य करने लगे।

Read More

इंद्रधनुष

एक उजली किरण के छू जाने से मन का चमन संदल-सा हो गया। ज़िंदगी फिर एक बार ख़ूबसूरत लगी, जैसे खुला आसमान ख़्वाहिशों को नई उड़ान दे गया हो। प्रेम की तरंगें, अधरों की मुस्कान, स्वप्न-सज्जित नयन, और मन की मंज़िल को पाई लगन — हर पंक्ति प्रेम, सौंदर्य और आत्मिक उल्लास से भीगी हुई है।

Read More