रामायण के अयोध्या कांड की सम्पूर्ण कथा पढ़ें। जानिए कैसे श्रीराम ने पिता के वचन की रक्षा के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया और धर्म की सर्वोच्च मिसाल प्रस्तुत की।

अयोध्या कांड : टूटा राजतिलक

अयोध्या कांड की कथा रामायण का वह मार्मिक अध्याय है, जिसमें श्रीराम ने पिता के वचन की रक्षा के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। त्याग, धर्म, मर्यादा और आदर्श जीवन का संदेश देने वाली यह कथा आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, विश्वामित्र और सीता स्वयंवर का दिव्य दृश्य

बालकांड: जहां से शुरू हुई श्रीराम की मर्यादा

रामायण कथा श्रृंखला के प्रथम भाग बालकांड में पढ़ें भगवान श्रीराम के जन्म, बाल्यकाल, विश्वामित्र के साथ वनगमन, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और माता सीता स्वयंवर की दिव्य एवं प्रेरणादायक कथा।

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रावण दहन

यह लेख रावण दहन की पौराणिक कथा को जीवंत और संवादात्मक अंदाज़ में प्रस्तुत करता है। इसमें बताया गया है कि रावण केवल एक राक्षस नहीं बल्कि विद्वान और शिवभक्त था, पर अहंकार और लालच के कारण उसका संहार निश्चित था। लंका युद्ध के समय देवी दुर्गा की पूजा और हनुमानजी की चतुरता से रावण का यज्ञ विफल हुआ और उसका संहार सुनिश्चित हुआ। इस कथा के माध्यम से विजया दशमी केवल पुतला जलाने का उत्सव नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक बन जाती है।

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रावण का कद बढ़ रहा है ?

यह लेख दशहरे के प्रतीक रावण के पुतले को मात्र लकड़ी और कागज़ का नहीं बल्कि समाज में बढ़ते अहंकार, लालच, क्रोध और दिखावे का प्रतीक बताता है। जैसे-जैसे पुतले का कद हर साल बढ़ता है, वैसा ही हमारे विचारों और आचरण में भी बुराई का आकार बढ़ रहा है। असली विजयादशमी तब होगी जब हम केवल पुतले जलाने तक सीमित न रहकर अपने भीतर के अहंकार, ईर्ष्या और क्रोध को जलाएँ, दूसरों की सफलता से प्रेरणा लें और सादगी, सत्य और नैतिकता को जीवन का आधार बनाएँ। लेख समाज में व्याप्त बुराई और दिखावे के प्रति चेतावनी देते हुए पाठकों को आत्मचिंतन और सकारात्मक परिवर्तन की ओर प्रेरित करता है।

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रामायण गाथा : धर्म की विजय

यह पद्यांश रामायण की मुख्य घटनाओं का संक्षिप्त और भावपूर्ण चित्रण करता है। इसमें वर्णन है कि दशरथ के प्रिय पुत्र श्रीराम ने पिताजी की आज्ञा का पालन करते हुए राजपाट त्यागकर सीता और लक्ष्मण के साथ वनगमन किया। स्वर्ण मृग की माया से सीता का हरण रावण ने साधु का वेश धरकर किया, जिसके बाद श्रीराम और लक्ष्मण व्याकुल होकर वन-वन सीता की खोज में निकले।

मार्ग में घायल जटायू मिले, जिन्होंने अपने प्राण त्यागकर सीता हरण का समाचार दिया। आगे चलकर श्रीराम को हनुमान, सुग्रीव और वानर सेना का सहयोग मिला। हनुमान ने सीता को खोजकर उनकी निशानी अंगूठी पहुँचाई और लंका दहन किया। नल-नील की सहायता से समुद्र पर सेतु का निर्माण कर श्रीराम की सेना लंका पहुँची। वहाँ भीषण युद्ध हुआ, जिसमें रावण का वध कर धर्म की विजय स्थापित की गई। अंततः देवताओं और ऋषियों ने प्रभु राम का गुणगान किया और उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में वंदित किया।

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दशहरा पर्व

दशहरा का पर्व असुरों के विनाश और धर्म की विजय का प्रतीक है। जब रावण का अंत हुआ, तब देवता भयमुक्त होकर उल्लास से दुंदुभियाँ बजाने लगे और अप्सराएँ गान करने लगीं। ऋषि-मुनि अपने जप और ध्यान में और अधिक एकाग्र होकर उन्मुक्त हो उठे। विभीषण को लंका का राज्य देकर भगवान राम अपने वनवास का अंत कर अयोध्या लौटे। नगरवासियों ने विजयध्वजा फहराई, माता सीता की आरती उतारी और पुष्पों की बौछार की। उस बेला में मिलन और उल्लास का ऐसा वातावरण बना कि नर-नारी आनंद में झूमकर नृत्य करने लगे।

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