होली के अवसर पर रंगों से खेलते लोग, गुलाल और अबीर उड़ाते हुए, आत्मीयता और प्रेम का दृश्य

होली : आत्मीयता का पर्व

होली भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख रंगोत्सव है, जो फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, सौहार्द और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। होलिका-दहन असत्य और अहंकार के अंत का संदेश देता है, जबकि रंगों की होली आपसी आत्मीयता को मजबूत करती है। यह पर्व हमें जीवन के विविध रंगों को स्वीकार कर प्रेम और सद्भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

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दशहरा पर्व

दशहरा का पर्व असुरों के विनाश और धर्म की विजय का प्रतीक है। जब रावण का अंत हुआ, तब देवता भयमुक्त होकर उल्लास से दुंदुभियाँ बजाने लगे और अप्सराएँ गान करने लगीं। ऋषि-मुनि अपने जप और ध्यान में और अधिक एकाग्र होकर उन्मुक्त हो उठे। विभीषण को लंका का राज्य देकर भगवान राम अपने वनवास का अंत कर अयोध्या लौटे। नगरवासियों ने विजयध्वजा फहराई, माता सीता की आरती उतारी और पुष्पों की बौछार की। उस बेला में मिलन और उल्लास का ऐसा वातावरण बना कि नर-नारी आनंद में झूमकर नृत्य करने लगे।

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