
डॉ. ऋषिका वर्मा, गढ़वाल उत्तराखंड
नवरात्रि का महत्त्व अत्यंत पवित्र और गहन है। यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है—चैत्र और आश्विन माह में। नवरात्रि का अर्थ है “नौ रात्रियाँ”, जिनमें माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा और साधना की जाती है। यह पर्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
नवरात्रि आत्मशुद्धि और आत्मबल का प्रतीक है। इसमें उपवास और संयम द्वारा शरीर को शुद्ध किया जाता है, साथ ही ध्यान, पूजा और मंत्रजप से मन और आत्मा को पवित्र बनाया जाता है। भक्तजन देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करके अपने जीवन में शक्ति, साहस, ज्ञान, करुणा और भक्ति का संचार करते हैं। यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि सत्य, धर्म और न्याय की विजय अवश्य होती है और असत्य व अधर्म का अंत निश्चित है।
नवरात्रि का एक गहरा सांस्कृतिक पक्ष भी है। इस अवसर पर पूरे देश में अलग-अलग रीति-रिवाजों और लोक-परंपराओं के साथ उत्सव मनाया जाता है। कहीं गरबा और डांडिया खेला जाता है, तो कहीं रामलीला का मंचन होता है। यह पर्व समाज में उत्साह, एकता और सहयोग की भावना को जागृत करता है।
नवरात्रि स्त्री-शक्ति के आदर और सम्मान का पर्व है। माँ दुर्गा के रूप में नारी की शक्ति, साहस और ममता का स्मरण कर हमें यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में कठिनाइयों और संकटों का सामना धैर्य और संकल्प से करना चाहिए।
इस प्रकार नवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानवीय जीवन को शुद्ध, अनुशासित और ऊर्जावान बनाने वाला आध्यात्मिक पर्व है, जो हमें शक्ति, भक्ति और विजय का मार्ग दिखाता है।