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शिव की शिवा 

सम्पूर्ण वातावरण ढोल, ढाक और ताशों की लयबद्ध ध्वनि से गूँज रहा था। घर-घर से दुर्गा स्तोत्र और आरती के साथ शंख और घंटियों की आवाज़ें आ रही थीं। शारदीय नवरात्र और देवी दुर्गा मइया की भक्ति में शहर डूबा था।नौमी की संध्या-आरती के बाद मालकिन ने फलाहार किया और रेशमा को भी खाने दिया। रेशमा, जिसे बचपन से मालकिन ने गोद में रखा और नाम दिया था, उनकी हर बात और हर काम का अनुसरण करती थी।
शरद की ठंडी रात में, मालकिन ने खिड़की से देखा कि एक लड़की बेतहाशा भाग रही है — पीछे दो-तीन गुंडे उसका पीछा कर रहे थे। लड़की की पीठ और बाँह घायल थी। मालकिन तुरंत देवी माँ से प्रार्थना करती हुई उसके पीछे दौड़ीं।

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नारी के सम्मान से ही देवी पूजा सार्थक

नवरात्रि और दुर्गा पूजा केवल देवी की मूर्तियों की आराधना तक सीमित नहीं हैं। यदि समाज में नारी असुरक्षित है, तो देवी पूजन का वास्तविक भाव अधूरा रह जाता है। नारी सिर्फ पूजा का विषय नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकारों की अधिकारी है। उसे सुरक्षा, स्वतंत्रता और समानता मिलती है, तभी देवी की शक्ति, ज्ञान और ममता का प्रतीक सजीव होता है। भारतीय परंपरा में नारी को ‘शक्ति’ कहा गया है, और वही शक्ति घर और समाज की आधारशिला है। मंदिर में दीप जलाना आसान है, पर हर घर, गली और कार्यस्थल पर नारी को सुरक्षित और स्वतंत्र बनाना ही सच्ची भक्ति है। नवरात्रि हमें यही प्रेरणा देती है कि नारी को देवी मानने का अर्थ केवल पूजा नहीं, बल्कि उसके जीवन को सम्मानजनक और सुरक्षित बनाना है।

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माँ शैलपुत्री

सुनीता मलिक सोलंकी, मुजफ्फरनगर (उप्र) प्रथम शैलपुत्री देवी,आज नवरात्र में कृपा बरसाए माँ।भक्तों ने सारे तेरे मंदिर सजाए माँ।। पहला दिन शैलपुत्री स्वरूप,पर्वतराज हिमालय की पुत्री तू।पूर्व जन्म में राजा दक्ष की थी पुत्री,तब माँ का नाम पड़ गया था सती।। तेरी महिमा सारी कह न सके माँ,भक्तों ने सारे तेरे मंदिर सजाए माँ।। सती…

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नवरात्रि पर्व का हिन्दू धर्म में महत्त्व

“नवरात्रि का महत्त्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, आत्मबल और मानवीय जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला पर्व है। नौ रातों तक माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना से भक्त अपने जीवन में शक्ति, साहस, ज्ञान और भक्ति का विकास करते हैं। उपवास और संयम शरीर को शुद्ध करते हैं, जबकि ध्यान, पूजा और मंत्रजप मन और आत्मा को पवित्र बनाते हैं।

यह पर्व हमें यह शिक्षा देता है कि सत्य और धर्म की विजय निश्चित है, जबकि असत्य और अधर्म का अंत होना अवश्यंभावी है। नवरात्रि का सांस्कृतिक पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है—देशभर में गरबा, डांडिया और रामलीला जैसे उत्सव समाज में उत्साह, एकता और सहयोग की भावना जगाते हैं। साथ ही, यह पर्व स्त्री-शक्ति के आदर और सम्मान का प्रतीक है, जो हमें याद दिलाता है कि नारी केवल स्नेह और ममता की मूर्ति नहीं, बल्कि संकटों का सामना करने वाली साहस और संकल्प की प्रतिमूर्ति भी है।

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