दिल के ये जख्‍म…

दिल के ये जख्‍म बन जाते हैं जब अक्षर
कोई नगमा, कोई गीत आता है उभरकर।

हर दर्द को सहेजता है ये दिल मेरा,
सपनों की दुनिया में बनता एक बसेरा।

आसमान छूने की उमंग जगाता है,
हर ख़्वाब को अपनी ग़ज़ल बनाता है।

मिलते हैं कई सुर धड़कनों की सरगम से,
सुनाई देता एक संगीत हर खुशी हर गम से।

बिखरे पलों को समेट लेता है संगीत,
हर ग़म को बना देता है मीठा प्रीत।

हर अक्षर में छिपी होती है एक दास्तां,
जो दिल से निकलकर छू ले आसमां।

तो चलो बनाएं इस दर्द को मधुर तराना,
जीवन के हर पल को बना दें अफ़साना।

गीतों में ढूंढें अपनी कहानी का साज़,
दिल के हर जख्म को दें नया अंदाज़।

डॉ. शशिकला पटेल, असिस्‍टेंट प्रोफेसर आर. आर. एज्‍युकेशनल ट्रस्‍ट बी. एड. कॉलेज (मुलुंड पूर्व) मुंबई

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