अजब-गजब के रिश्ते

मैंने कई रिश्तों से गुज़रते हुए बहुत कुछ देखा है। मैंने उन लोगों को देखा जो दिल और जान से मरने वाले थे, पर उनके ही सीने में खंजर उतरते थे। जो लोग महफ़िलों में सीना चौड़ा करके सामने आते थे, उन्हें पीठ में वार करते देखा है। रात भर चादर की सिलवटों को और सुबह उसी चादर को सीधा होते भी देखा है। मैंने उन लोगों को भी देखा जो ताउम्र जख्म देते रहे, और फिर उनके कंधों पर सिर रखकर रोते थे। जिंदगी में बहारों का मौसम लेकर आने वाले लोगों को अक्सर ऐसे लोगों को विरानियों में बदलते हुए देखा है।

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दिल के ये जख्‍म…

यह कविता दिल के जख़्मों और दर्द को शब्दों और संगीत के रूप में ढालने की बात करती है। इसमें भाव है कि दिल अपने हर दर्द, हर टूटे सपने और हर बिखरे पल को सहेजकर उन्हें गीत, नग़मा और ग़ज़ल में बदल देता है। दुख और तकलीफ़ भी जब सुर और लय में ढलते हैं तो वे मधुर तराने बन जाते हैं। हर अक्षर एक दास्तां कहता है, हर धड़कन में संगीत छिपा है, और हर ग़म को गीत एक मीठे अहसास में बदल देता है। यह दृष्टिकोण जीवन को केवल तकलीफ़ों की कहानी न मानकर, उन तकलीफ़ों को एक सुंदर अफ़साने और मधुर यादों में ढालने की प्रेरणा देता है।

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