Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

अजन्‍मी बेटी के सवाल

अभी तक तो मैंने जहॉं भी न देखा

क्‍यों तुमने मिटा दी मेरे जीवन की रेखा

मॉं, मैं तो थी बस धड़कन तुम्‍हारी

फिर भी तुम्‍हें क्‍यों हुई न मैं प्‍यारी

अभी मैंने सांसें न ली इस जहां में,

फिर भी मैं तुम पर हुई बोझ भारी

मुझे इस तरह से तूने दिल से फेका

अभी तक तो मैंने जहॉं भी न देखा

क्‍यों……

बेटे से मुझको मॉं कम तुमने जाना

जहॉं के उसूलों को क्‍यों तुमने माना

पापा औ दादी की बात ही अलग थी,

तुम्‍हें भी न भाया, मेरा जग में आना 

कैसे तूने जाना मेरे भाग्‍य का लेखा

अभी तक तो मैंने जहॉं भी न देखा

क्‍यों……

गर मॉं मुझे तू इस जहां में लाती

सुनीता, कल्‍पना मैं बन कर दिखाती

इंदिरा, किरण बन, साक्षी औ सिंधू  

तेरा नाम जग में रौशन कर जाती 

तुमने जरा भी ये क्‍यों न सोचा

अभी तक तो मैंने जहॉं भी न देखा

क्‍यों….

गर मां मुझे तुम जरा प्‍यार देती 

तेरा हर एक सपना, मैं संवार देती

करती निछावर हर खुशी मैं तुम पर 

तेरी सेवा में, जीवन गुजार देती 

मेरी ख्‍वाहिशों को किया अनदेखा

अभी तक तो मैंने जहॉं भी न देखा

क्‍यों…….

डॉ. शशिकला पटेल असिस्‍टेंट प्रोफेसर
आर. आर. एज्‍युकेशनल ट्रस्‍ट बी. एड. कॉलेज मुलुंड पूर्व मुंबई

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *