कभी किसी ने पूछा-
तुम खुद को बहुत पसंद करती हो, ना?
और मुस्कुराते हुए जवाब मिला
-बहुत मैं अपनी फेवरेट हूं!
क्या आप भी ऐसा कह सकते हैं?
अगर हां, तो बहुत अच्छा.
अगर नहीं तो अब वक्त आ गया है कि आप भी कह सकें ङ्गङ्घमैं प्यार में हूं अपने ही प्यार में.
हम अक्सर यह सोचकर चौंक जाते हैं जब कोई कहे कि वो प्यार में है. हमारी पहली कल्पना होती है किसी और के लिए महसूस किया गया प्रेम. पर इस बार बात कुछ और है.
यह प्यार किसी और के लिए नहीं खुद के लिए है.
हममें से ज्यादातर लोग पूरी ज़िंदगी दूसरों को खुश करने में निकाल देते हैं.
कभी माता-पिता, कभी जीवनसाथी, कभी दोस्त, कभी समाज.
हर किसी को मनाने और समझाने की कोशिश में हम खुद से संवाद करना ही भूल जाते हैं.
और फिर एक दिन अचानक महसूस होता है कि हम दूसरों के लिए तो बहुत जिए, पर खुद के लिए कब जिए?
खुद से प्यार क्यों जरूरी है?
क्या इतना काफी नहीं कि ऊपरवाले ने हमें बिल्कुल अनोखा बनाया है?हर इंसान अपने आप में एक अनूठी रचना है.तो फिर हम खुद को ही नजरअंदाज क्यों करें?
खुद से प्यार करने का मतलब है
खुद को स्वीकार करना
अपनी खूबियों को सराहना
अपनी कमियों को अपनाना
और सबसे ज़रूरी अपने साथ समय बिताना.
कैसे करें शुरुआत?
खुद से प्यार करना कोई कठिन कार्य नहीं है.
आप रोज़मर्रा की छोटी-छोटी चीज़ों से इसकी शुरुआत कर सकते हैं:
दिन में दस मिनट बस अपने लिए निकालें.
जो दिल कहे वो करें गाना सुनें, टहलने जाएं, किताब पढ़ें, या बस शांत बैठें.
खुद से बात करें. खुद को सुनें.
कभी हंसें, तो कभी रो लें भावनाओं को खुलने दें.
बच्चों के साथ खेलें, बारिश में भीगें, फेस पैक लगाएं, आराम करें, देर से उठें जो सुकून दे वही करें.
और हां, कभी खुद से रूठें, फिर खुद को ही मना लें.
ये सब करना किसी की तरह नहीं, एक ज़रूरत की तरह अपनाएं.
खुद को अपना फेवरेट बनाइए
हर दिन जब आप सोने जाएं,
आईने में देखिए और खुद को एक प्यारी सी मुस्कान दीजिए.
क्योंकि अगर कोई इंसान इस दुनिया में सबसे पहले आपके करीब है, तो वो आप खुद हैं.
तो क्या कहते हो?
नेक काम में देरी कैसी?
आज से ही खुद से प्यार करना शुरू करें.क्योंकि जब आप खुद से प्यार करेंगे, तभी दुनिया भी आपको उसी नजर से देखेगी.खुद को फेवरेट बनाइए. खुद को ही अपना सबसे बड़ा सपोर्टर और साथी मानिए. प्यार में रहिए…अपने ही प्यार में.

शिल्पा सिन्हा, प्रसिद्ध लेखिका, कोल्हापुर