
डॉ. सविता मिश्र
पेड़ पर बैठी
एक छोटी चिड़िया
गर्म पत्तों में मुंह छुपाए
पीती रही दोपहरी का ताप
झुलसते पंखों पर
पंखा झलने लगा पेड़
हवा गर्म थी
सुलग रही थी दुपहरी
पर चिड़िया के लिए
पेड़ की आंखों में अथाह प्रेम था
चिड़िया ने पेड़ से कहा
हवा बहुत ठंडी है
पेड़ चुप रहा
झलता रहा पंखा
चिड़िया ने पी लिया उसका प्रेम
और सो गई चुपचाप
