गर्म दोपहर में पेड़ की शाख पर बैठी एक छोटी चिड़िया, जो पेड़ की छाया और प्रेम में सुकून से सो रही है।

प्रेम

‘प्रेम’ एक छोटी लेकिन गहरी संवेदनाओं से भरी कविता है। पेड़ और चिड़िया के माध्यम से यह कविता बताती है कि सच्चा प्रेम शब्दों का नहीं, बल्कि मौन समर्पण, संरक्षण और अपनत्व का नाम है। प्रकृति के प्रतीकों में जीवन का सबसे सुंदर रिश्ता यहाँ सहजता से उभरता है।

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बसेरा

‘बसेरा’ एक संवेदनशील लघुकथा है, जिसमें पेड़ और चिड़ियों के संवाद के माध्यम से विकास और विनाश के द्वंद्व को उकेरा गया है। यह कथा प्रकृति, सह-अस्तित्व और मानवीय हस्तक्षेप के कारण उजड़ते आश्रयों की पीड़ा को अत्यंत मार्मिक ढंग से सामने लाती है।

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