Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
गर्म दोपहर में पेड़ की शाख पर बैठी एक छोटी चिड़िया, जो पेड़ की छाया और प्रेम में सुकून से सो रही है।

प्रेम

‘प्रेम’ एक छोटी लेकिन गहरी संवेदनाओं से भरी कविता है। पेड़ और चिड़िया के माध्यम से यह कविता बताती है कि सच्चा प्रेम शब्दों का नहीं, बल्कि मौन समर्पण, संरक्षण और अपनत्व का नाम है। प्रकृति के प्रतीकों में जीवन का सबसे सुंदर रिश्ता यहाँ सहजता से उभरता है।

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बारिश में अपने अंडों को बचाती चिड़िया, मां के निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक

जब तूफान से लड़ी एक मां

मां का प्रेम निस्वार्थ और अटूट होता है। एक छोटी सी चिड़िया, जो तेज बारिश और तूफान में भी अपने अंडों की रक्षा के लिए अडिग खड़ी रही, हमें ममता का सच्चा अर्थ समझाती है। यह भावनात्मक अनुभव हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या इंसानों में भी ऐसा ही निष्काम प्रेम मौजूद है।

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खामोश कमरे में अकेली स्त्री खिड़की के पास बैठी बाहर देखती हुई, चेहरे पर प्रतीक्षा और टूटे प्रेम का भाव, शाम की धुंधली रोशनी और उदास वातावरण।

मुख़्तसर मुलाक़ात, लंबा इंतज़ार

यह कविता प्रेम के उस रूप को उजागर करती है जहाँ चाहने वाला टूटता है और जाने वाला वादा लेकर चला जाता है। शब्दों में ठहरा दर्द और अधूरा इंतज़ार इसकी आत्मा है।

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प्रश्नचिह्न

कभी-कभी निस्वार्थ प्रेम पर भी प्रश्नचिह्न लगते हैं। आँखों में चमक तो होती है—कभी हीरे की, कभी तारे की—पर दोनों की चमक में अंतर होता है, दिखावे का। दोनों दृष्टिगत होते हुए भी दृष्टि की गहराई में फर्क ममता का होता है। तारा ऊँचाई पर है, हीरा गहराई में; दोनों ही दुर्लभ हैं, पर दिल की दूरी उन्हें अलग करती है। किसी को विरासत में सूर्य की रोशनी और चाँद का आशीर्वाद मिलता है, तो कोई अंधेरी अमावस के कुओं से अंधेरा पीता है। सच्ची परख गुमनाम परतों में छिपी होती है, कवि की कल्पनाओं में नहीं—उसे पहचानने के लिए लंबे हाथ नहीं, गहराई चाहिए। शायद इसी कारण, कभी-कभी ममता पर भी प्रश्नचिह्न लग जाता है।

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