बिटिया

अपनी बिटिया को स्नेह से गोद में लिए एक भारतीय माँ का भावपूर्ण दृश्य

नीलम पेड़ीवाल, जमशेदपुर (झारखण्ड)

आया बिटिया रूप में,
ईश्वर का उपहार।
यही स्वर्ग की अवधारणा,
पाकर प्यार-दुलार।।

श्रावण शुक्ल नवमी के दिन,
आई बिटिया मेरे आँगन।
चहुँदिशि गूँज रही थी बधाई,
आनंदित हुआ मेरा अंतर्मन।।

माँ बनने का सुख मैंने पाया,
मुस्कान उसकी देख मन हर्षाया।
प्यारी सूरत देख उसकी,
मेरा मन फूला न समाया।।

बेटी मेरी दिल का टुकड़ा,
पहले देखूँ उसका मुखड़ा।
रहती बनकर मेरा साया,
विश्वास कभी न उसने तोड़ा।।

नसीब से मिलती बेटियाँ,
नाम रोशन करती बेटियाँ।
जहाँ दुःख का नाम नहीं हो,
ज़िंदगी रोशन करती बेटियाँ।।

जहाँ भी रहे, आनंदित रहे,
मन की बातें मुझसे कहे।
संघर्षों से आगे बढ़े सदा,
सभी खुशियाँ उसे मिलती रहें।।

हरदम साथ रहती है मेरे,
सपने पूरे करती है मेरे।
माँ बनकर समझाती है मुझे,
सुखद एहसास कराती है मुझे।।

भगवान ऐसी बेटियाँ सबको दें,
सुख, सम्मान और प्रेम से भर दें।
हर आँगन में खुशियाँ महकें,
ऐसी प्यारी बेटियाँ सबको दें।।

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