
डॉ.शशिकला पटेल, मुंबई
मनवा खाए हिचकोले, जब-जब बहे समीर,
तेरी यादों की खुशबू कर दे तन-मन अधीर।
शीतलता महसूस हो जैसे सागर का नीर,
तेरे स्पर्श का जादू हर ले मन की पीर।
तेरे आने की आहट से धड़कन हो बेकरार,
सपनों की गलियों में सजता तेरा संसार।
नैनों के दर्पण में जब उभरे तेरी तस्वीर,
रंगों से भर जाता है मेरा हर एक नज़ारा।
चाँदनी रातों में तेरा ही नाम पुकारूँ,
तारों की छाँव तले तुझमें ही मैं सँवरूँ।
धड़कनों की सरगम कहे, तू है बेनज़ीर,
तू ही मेरी चाहत, तू ही मेरी तक़दीर।
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