
रीता मिश्रा तिवारी प्रसिद्ध लेखिका, भागलपुर
काम निपटा कर TV खोलकर बैठ गई शेफाली पिक्चर में एक सीन देखा तो अतीत का एक और पन्ना फड़फड़ाने लगा…
कॉलेज के गेट पर पहुँचते_पहुंचते तेज़ हवा के साथ बारिश शुरू हो गई छतरी खोल कर वो जैसे आगे बढ़ी पैर क्या चप्पल कहिए फिसल गया गिरने ही वाली थी कि दो मजबूत हाथों ने संभाल लिया और छतरी उड़कर कहीं और..
“अभी गिर जातीं, वो तो मैंने संभाल लिया नहीं तो… “
चेहरा आमने सामने होते ही…”आप ” साथ में दोनो का स्वर मिला था।
“मेरा कॉलेज और आप यहां कैसे..?” शेफाली का प्रश्न था ।
“जी मेरा भी, मास्टर्स कर रहा हूँ।”
“पहले तो कभी नहीं देखा..? “
“जी दो दिन हुआ आए हुए और आपसे ऐसे मुलाकात होगी…जमुई घर है मेरा, वहां फेकल्टी…
“अच्छा समझ गई। सब्जेक्ट क्या है..?”
अरे भाई क्लास जाकर भी सवाल जवाब कर सकते हो
या फिर जान बूझकर बारिश का…
विद्यार्थियों तंज कसा।
ओय होय क्या बात है शेफाली आज कुछ बदली सी नज़र आ रही, कुछ तो है…!
“बकवास बंद करो” शेफाली गरजी।
दोनों कॉलेज के अन्दर आ अपने क्लास में बैठ गए।
कपड़ा भींग जाने से शेफाली सिकुड़ी सिमटी बैठी थी।
रीता को नहीं आना था तो बता सकती थी ।अब क्या करूं छतरी भी उड़ गया।घर कैसे जाउंगी ठंड भी लग रहा है। मेरी ही मति मारी गई थी मां मना कर रही थी फिर भी…मन ही मन सोच रही थी शेफाली।
“शेफाली..! इस सवाल का जवाब नहीं मालूम तुम्हें..?क्या हुआ ऐसे क्या देख रही हो तबियत ठीक है..?” टीचर ने कहा
शेफाली का ध्यान टीचर की बातों पर नहीं गीले कपड़ों में खड़े उस लड़के पर था जो फटाफट उत्तर दे रहा था।
वो सोचने लगी इस क्लास में पढ़ाई में मुझे टक्कर देने वाला कौन है ये बंदा..!
“क्लास में नहीं आज ये कहीं और है सर”
सम्मिलित ठहाकों से क्लास गूंजने लगा।
“शटप चुप हो जाओ सब” क्लास में सन्नाटा पसर गया।
” सर..! मुझे घर जाना है ” शेफाली ने धीरे से कहा।
दुसरे दिन उन दोनो की फिर से मुलाकात हो गई लाइब्रेरी में।
“Hi.. उस दिन के लिए सॉरी मेरी वजह से सबने..!
मेरी मां ने मेरा नाम करण रखा है और आपका..?”
“शेफाली यही किताब चाहिए था न तुम्हें कल ढूंढ रही थी आ गई है ये लो।
तुम्हें कौन सी किताब चाहिए और कार्ड किधर है..”? लाइब्रेरी की मैडम शेफाली को किताब देते करण से बोली।
“जी मैम ये रहा मेरा कार्ड.. अच्छा तो आप शेफाली हैं..!” मैम को कार्ड देते करण ने पूछा।
हां में सिर हिला कर वो बाहर आकर पेड़ के नीचे बैठ गई।
एक साथ एक ही क्लास,लाइब्रेरी गार्डन में बैठते पढ़ाई करते दोनो में घनिष्ठता इतनी बढ़ गई की फ़ोन नंबर एक दुसरे के पास चला गया।
इसी बीच रीता की शादी हो गई।
बीतते वक्त ने दोनों की दोस्ती को प्यार में बदल दिया इतना की मर्यादा की सीमा लांघ गए दोनो।
“मैं प्रेगनेंट हूँ करण…! चलो न हमलोग मंदिर में शादी कर लेते हैं फिर तो तुम्हारे और मेरे मां पापा मान ही जाएंगे।”
“मैं इकलौता हूँ, पापा हैं नहीं मेरे मम्मी की खुशी मेरी खुशी में है।
रही बात तुम्हारी तो उनके परमिशन के बिना मैं कुछ नहीं करूंगा शेफाली। तुम चिंता मत करो मैं कल ही अपनी मम्मी को बात करने तुम्हारे घर भेजता हूँ।”
“आपकी हिम्मत भी कैसे हुई जो मुंह उठा कर चले आए मेरी बेटी का रिश्ता मांगने। जिस सुख सुविधा में रही है वो क्या आप दे सकते हैं..?दस लाख की गाड़ी में चलती है हजारों रुपए की ड्रेस चप्पल खान पान क्या कुछ की भी औकात है आपकी..?”
“दोनों बच्चे एक दुसरे से बहुत प्यार करते हैं।”
“प्यार से पेट नहीं भरता न ही जरूरतें और शौख पूरे होते हैं मैडम; जाइए अपनी औकात वाले से रिश्ता करिए बेटे का।”
“अब क्या होगा करण..! क्या करेंगे हम जब पता चलेगा की मैं…”
“डोंट वरी मैं खुद कल अंकल से बात करूंगा “
बहुत कहने सुनने पर भी पापा तैयार नहीं हुए तो मां बोली “प्यार करते हैं दोनों… बच्ची की खुशी के लिए मान जाइए न।”
“औकात है नहीं पढ़ाई पूरी हुई नहीं चले हैं प्यार और विवाह करने। चलो मान लेते हैं।
लाख रुपया महीना कमा सकते हो..?”
“जी मैं कमाऊंगा वचन देता हूँ ।”
“फिर ठीक है जिस दिन लाख रुपए कमाने लगो आ जाना और हां इस बीच दोनो का मिलना जुलना बात चीत सब बंद।”
“जी मंजूर है “
पैरों तले जमीन निकल गई जब पता चला शेफाली मां बनने वाली है। बहुत समझाने बुझाने के बावजूद अवॉरशन के लिए राजी ना हुई शेफाली।
शेफाली को लेकर मां पापा भागलपुर से दिल्ली आ गए। यहीं शेफाली ने बेटे को जन्म दिया।
उसके पूछने पर कहा…”बच्चा को बचाया नहीं जा सका काफी कमजोर और हार्टविट बहुत स्लो था जिसके कारण….!”
शेफाली उदास रहने लगी साल बीत गया करण कहां है क्या कर रहा कुछ पता नहीं।
बहुत बड़े नामी विजनेसमेन जो पापा का दोस्त था उनका बेटा रोहन हैंडसम और बहुत बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में ऊंचे ओहदे पर कार्यरत था शेफाली के न चाहते हुए भी उससे शादी करके दिल्ली आ गई।
“मम्मी मैं रेडी हो गया पापा कब तक आयेंगे..?
गोलू की आवाज से शेफाली की तंद्रा भंग हुई।……
क्रमश: ….
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अब क्या होगा -3
लेखिका के बारे में-
रीता मिश्रा तिवारी
हिंदी साहित्य जगत की एक सशक्त और संवेदनशील रचनाकार हैं, जिनका जन्म 12 दिसंबर 1967 को बिहार के भागलपुर में हुआ। शिक्षिका के रूप में दीर्घकालीन सेवा के पश्चात आज वे सेवा निवृत्त होकर पूर्णतः साहित्य सृजन में समर्पित हैं। एम.ए. एवं बी.एड. शिक्षित रीता जी ने ज्ञान और संस्कारों का दीप जलाते हुए समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। कविता, कहानी, लघुकथा, हाइकु, संस्मरण और आलेख जैसी विविध विधाओं में उनकी लेखनी समान रूप से सशक्त और प्रभावशाली है। उनकी रचनाओं में जीवन की संवेदनाएँ, समाज की सच्चाइयाँ और मानवीय भावनाओं की गहराई स्पष्ट झलकती है। आकाशवाणी भागलपुर से उनके काव्य एवं कथा पाठ का नियमित प्रसारण उनकी साहित्यिक सक्रियता का प्रमाण है। उनकी प्रमुख कृतियों में “अविता” (एकल कहानी संग्रह) और “प्रेम लौटता है” (एकल काव्य संग्रह) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इसके अतिरिक्त वे अनेक प्रतिष्ठित साझा काव्य एवं कहानी संकलनों का हिस्सा रही हैं। देश-विदेश की पत्र-पत्रिकाओं और ई-पत्रिकाओं में उनकी 300 से अधिक रचनाएँ प्रकाशित होकर पाठकों के बीच सराही जा चुकी हैं। रीता मिश्रा तिवारी के लिए साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज का सजीव दर्पण है, जिसमें जीवन के अनछुए पल, अनुभव और यथार्थ सजीव हो उठते हैं। उनकी लेखनी न केवल विचारों को झकझोरती है, बल्कि पाठकों के हृदय को भी गहराई से स्पर्श करती है।
