बारिश, प्यार और बिछड़ाव की कहानी

अब क्या होगा..

टीवी पर चलता एक सीन जैसे ही शेफाली की आँखों में उतरा, अतीत के पन्ने खुद-ब-खुद खुलने लगे। बारिश की वो पहली मुलाकात, फिसलते कदम और करण के मजबूत हाथों का सहारा सब कुछ जैसे कल की ही बात हो। लाइब्रेरी की खामोशियों में पनपा प्यार कब हदें पार कर गया, उन्हें खुद भी पता नहीं चला। मगर हालातों ने ऐसा मोड़ लिया कि वही प्यार एक अधूरी कहानी बनकर रह गया। आज जब जिंदगी आगे बढ़ चुकी है, दिल के किसी कोने में वो यादें अब भी भीगती हैं बिल्कुल उस पहली बारिश की तरह।

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तेरी बिंदी

आज तुम्हारे भाल पर बिंदी बीचों-बीच सजनी चाहिए थी, पर तुमने उसे किनारे सरका दिया। यह कैसी गुस्ताख़ी? बस उसी को ठीक करने आया हूँ।”
उसने नंदिनी की बिंदी को मध्य में सजाया, और उसी क्षण उनकी साँसें थम-सी गईं।
रात को नंदिनी ने वही बिंदी आईने पर चिपकाते हुए धीमे से कहा—“अब यहाँ विराजिए निखिल जी… र हाँ, आँखें बंद रखना।”अगले दिन जब उसने निखिल का स्केच देखा, उस पर लिखा था—
“एक संपूर्ण रमणी नंदिनी।”

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