दो भारतीय महिलाओं के बीच अविश्वास और भावनात्मक दूरी को दर्शाता यथार्थवादी दृश्य, टूटा भरोसा और रिश्तों की खामोशी।

खामोशी

वर्षों पुरानी दोस्ती एक सवाल के सामने टूटने लगी—“क्या आपने मेरा सामान देखा था?” शक की उस छोटी-सी दरार ने भरोसे को खामोशी में बदल दिया। यह कहानी रिश्तों में अविश्वास, भावनात्मक दूरी और उन अनकहे दर्दों की है जो लंबे समय तक भीतर रह जाते हैं।

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बारिश, प्यार और बिछड़ाव की कहानी

अब क्या होगा..

टीवी पर चलता एक सीन जैसे ही शेफाली की आँखों में उतरा, अतीत के पन्ने खुद-ब-खुद खुलने लगे। बारिश की वो पहली मुलाकात, फिसलते कदम और करण के मजबूत हाथों का सहारा सब कुछ जैसे कल की ही बात हो। लाइब्रेरी की खामोशियों में पनपा प्यार कब हदें पार कर गया, उन्हें खुद भी पता नहीं चला। मगर हालातों ने ऐसा मोड़ लिया कि वही प्यार एक अधूरी कहानी बनकर रह गया। आज जब जिंदगी आगे बढ़ चुकी है, दिल के किसी कोने में वो यादें अब भी भीगती हैं बिल्कुल उस पहली बारिश की तरह।

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