स्व. सुरेशचंद्र चत्तर की 11वीं पुण्यतिथि पर गोगापुर गौशाला में स्वामी वात्सल्य

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे
महिदपुर रोड। बदलते दौर में जहां लोग व्यक्तिगत उत्सवों को केवल निजी स्तर तक सीमित रखते हैं, वहीं महिदपुर रोड के युवाओं ने एक प्रेरणादायक परंपरा विकसित की है। यहां के युवा अपने जन्मदिन, पारिवारिक अवसरों और पुण्यतिथियों को जीवदया और सेवा कार्यों से जोड़कर समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।
गौसेवा, पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था और गौरेया संरक्षण जैसे कार्यों के माध्यम से यह युवा पीढ़ी न केवल पर्यावरण और जीवों के प्रति संवेदनशीलता दिखा रही है, बल्कि समाज में सेवा भाव का संदेश भी प्रसारित कर रही है।
इसी क्रम में महिदपुर रोड के प्रसिद्ध कपड़ा व्यवसायी, गौसेवा एवं जीव दया प्रेमी स्वर्गीय सुरेश चंद्र चत्तर की 11वीं पुण्यतिथि के अवसर पर चत्तर परिवार द्वारा एक भव्य सेवा आयोजन किया गया। 18 अप्रैल, शनिवार को गोगापुर स्थित श्री कृष्ण गौशाला में प्रातः 10:00 बजे स्वामी वात्सल्य का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों गायों को हरी घास, फल एवं सब्जियों का आहार कराकर गौ माता की सेवा की गई।

इस आयोजन के लाभार्थी संदीप कुमार चत्तर एवं प्रणय कुमार चत्तर परिवार रहे, जिन्होंने इस अवसर को केवल एक स्मृति दिवस न बनाकर सेवा और पुण्य का माध्यम बनाया। कार्यक्रम में सकल जैन श्री संघ, अखिल भारतीय राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद, तरुण परिषद तथा नगर के अनेक गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस अवसर पर रमेशचंद्र बोथरा, मनोज बोथरा, अरविंद बरड़िया, राकेश कोचर, अमित कोचर, विशालभाऊ नवघाणे, संदीप चत्तर, परेश चत्तर, अमोल भंडारी, आशीष चोरड़िया, कुलदीपसिंह मक्कड़ सहित कई प्रतिष्ठित नागरिक उपस्थित रहे और सभी ने गौसेवा कर पुण्य लाभ अर्जित किया।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनों ने चत्तर परिवार द्वारा किए गए इस पुनीत कार्य की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल जीवों के प्रति करुणा बढ़ती है, बल्कि समाज में आपसी सहयोग और सेवा भावना भी मजबूत होती है।
जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं और नई पीढ़ी को सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। यह आयोजन न केवल एक पुण्यतिथि का कार्यक्रम था, बल्कि यह संदेश भी था कि यदि हर व्यक्ति अपने जीवन के विशेष अवसरों को सेवा और दया से जोड़े, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन निश्चित रूप से संभव है।
