
मौसमी चंद्रा
झरते रेत का कोई इतिहास नहीं होता
पर मेरी एड़ियों में पीढ़ियों की दरारें बसी हैं
मैं उस जगह की औरत हूँ
जहाँ पानी पहले कथा बनती है
फिर अफ़वाह और अंत में प्रार्थना
यहाँ धूप सीधी नहीं पड़ती
वह सवाल की तरह उतरती है
सूखी पीठ पर
मैंने टीलों को बदलते देखा है
जैसे बदलते हैं घरों के निर्णय
रातों-रात
मेरी ओढ़नी में बँधी हवा जब खुलती है
तो आधा गाँव जान जाता है
कि मैं अब भी जीवित हूँ
जानते हो किसी कवि ने नहीं लिखा
कि प्यास भी एक विरासत होती है
जो माँ से बेटी तक चुपचाप चली आती है
मुझमें भी ये विरासत बची है
चूड़ी की खनक में
बिना आवाज छिपी हुई
इस मरु में मैं खोती नहीं हूँ
बस फैल जाती हूँ
रेत की तरह
तुम अगर कभी दिशा भूल जाओ
तो आसमान मत देखना
धरती पर झुकना
जहाँ पाँव झक्क से जलते हैं
वहीं मेरी स्मृति ठहरी मिलेगी
मैं मिलती रहूंगी
मरुस्थल की उस पतली हरियाली की तरह
जो तुम्हारे लिए चमत्कार है
और हमारे लिए…जीवन
लेखिका के बारे में-
मौसमी चन्द्रा
हिंदी साहित्य की एक सशक्त और बहुआयामी रचनाकार हैं।12 अप्रैल 1980 को पटना में जन्मी मौसमी जी ने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की है। आपकी लेखनी में संवेदनाओं, रिश्तों और जीवन के विविध रंगों का सुंदर समावेश देखने को मिलता है।
आपके एकल संग्रहों में “टूटती साँकले”, “एक और अमृता”, “सप्तपर्णी” और “इश्क़ है कि जादू-टोना” विशेष रूप से चर्चित हैं।
संपादन के क्षेत्र में भी आपने “बात अभी बाकी है”, “बसंत आने को है” और “कुल्हड़ भर कहानियां” जैसी कृतियों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साझा संग्रहों में आपकी सक्रिय सहभागिता रही है, जिनमें “प्रतीक्षा में प्रेम”, “किस्सागो” और “गुंजित मौन” प्रमुख हैं। आपकी रचनाएँ 300 से अधिक समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुकी हैं, जो आपकी लोकप्रियता और लेखन क्षमता का प्रमाण हैं। आपकी पाँच लघुकथाओं का नेपाली भाषा में अनुवाद भी किया जा चुका है। डिजिटल मंचों और यूट्यूब चैनलों पर आपकी कहानियाँ और कविताएँ आपकी ही आवाज़ में श्रोताओं तक पहुँचती हैं। वर्तमान में आप “साहित्य प्रवासी” (प्रवासी संदेश) यूट्यूब चैनल की संपादिका के रूप में साहित्य सेवा में सक्रिय हैं।
मौसमी चंद्रा की तीन भागों में हॉरर स्टोरी जरूर पढ़ें
भाग-1 ब्लैकवुड वैली
भाग-2 ब्लैकवुड वैली
भाग-2 ब्लैकवुड वैली

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