
अंजली सिंह “अंशु”, प्रसिद्ध लेखिका, पुणे
रास्ते कठिन हैं तो क्या हुआ,
हौसलों में अभी जान बाकी है।
जो गिरकर फिर से उठना जान ले,
उसी की पहचान बाकी है।
अँधेरा चाहे कितना गहरा हो,
सूरज को निकलना आता है।
जो खुद पर विश्वास रखता हो,
वक्त भी उसी का साथ निभाता है।
हार मत मानो, चलते रहो,
मंज़िल खुद ही करीब आएगी।
आज जो संघर्ष है तुम्हारा,
कल वही कहानी बन जाएगी।
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