प्रेम और विश्वास को दर्शाती हिंदी कविता – तुम राज़दां हो मेरी

मनमीत

तुम मेरे जीवन का वह विश्वास हो, जो अँधेरों में भी राह दिखाता है। जब संसार डगमगाता है, तब तुम्हारी मौजूदगी मुझे स्थिर रखती है। यह साथ किसी वचन या शपथ से बड़ा है. यह आत्मा की स्वीकृति है, जहाँ भय का कोई स्थान नहीं। तुम्हारे इश्क़ में मुझे सुकून मिला है, ऐसा सुकून जो प्रश्न नहीं करता, केवल स्वीकार करता है। हम दो शरीर नहीं, एक ही चेतना के विस्तार हैं तुम मेरी साधना हो और मैं तुम्हारी आस्था। इसी निष्कपट प्रेम में जीवन की हर कठिनाई सहज हो जाती है, और हर पथ आलोकित।

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अंधेरे …

यह कविता जीवन की अंधेरी राहों में प्रेम, परिवार और आत्मबल की रोशनी तलाशती है। कवि कहता है. अंधेरे चाहे कितना भी घेर लें, हम एक-दूसरे को छोड़कर नहीं जाएंगे। थकी हुई आत्मा को सहारा देने के लिए सच्चा प्रेम ही पर्याप्त है। रिश्तों की डोर अगर प्यार से जोड़ी जाए तो परिवार हमेशा साथ रहता है। समय के कठिन क्षणों में सब साथ छोड़ जाते हैं, फिर भी प्रेम और आशा के सितारे जगमगाते हैं।

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हमने सीख लिया जीना

ज़िंदगी के ज़ख्मों में भी मुस्कुराना हमने सीख लिया है. अपनों के दिए हुए ज़हर के घूंट को पीकर भी अब हमें जीने की आदत हो गई है. हमने हंसी में अपने दर्द को छिपाना और दिल में ग़मों को दबाना सीख लिया है. अपनों के धोखे और वार से खुद को संभालना और दूसरों का हमदर्द बनकर उनके ज़ख्मों पर मरहम लगाना भी आ गया है. घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर जब हमने सांस ली, तब दुनिया की मक्कारी और चालें पढ़ना सीख लिया. इस काँटों से भरी बस्ती में रहकर भी हमने दूसरों तक खुशबू पहुँचाना सीख लिया. हमें अब यह भी समझ आ गया है कि मां-बाप के सिवा कोई सच्चा हितैषी नहीं होता, इसलिए दुनिया से थोड़ा किनारा करना भी हमने सीख लिया है.

कीचड़ और झंझटों से भरी इस दुनिया में रहते हुए हमने खुद को ईश्वर भक्ति में चमकाना सीख लिया है. अब दर्द भी हमें डराता नहीं, क्योंकि हमने सचमुच “जीना” सीख लिया है.

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ईश्वर को देखा

ईश्वर को किसी ने प्रत्यक्ष नहीं देखा, पर वह हर ओर विद्यमान है। साँसों की लय, धड़कनों की गति, सूरज की रोशनी, चाँद की चाँदनी, फूलों की मुस्कान और नदी की रागिनी—सब उसी विराट ऊर्जा के रूप हैं। हम सभी उसी अनंत चेतना के कण हैं, जो समय के साथ बहते रहते हैं। मोक्ष कोई शून्य नहीं, बल्कि जीवन का सार है, जो सृष्टि से तादात्म्य स्थापित करने पर मिलता है। जब हृदय में करुणा, प्रेम और संवेदना खिलते हैं, तभी ईश्वर का सच्चा अनुभव होता है।

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