हिंदी कविता
वसंत का संगीत
यह कविता बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर सरस्वती माता के आशीर्वाद, प्रकृति के बदलते रंग और ऋतुओं के मिलन को उजागर करती है। वसंत के आगमन से जीवन में उमंग और विद्या की महत्ता का सुंदर चित्रण।
वसंत नहीं लौटता
यह कविता बसंता और वसंत के प्रतीक के माध्यम से श्रम, विस्थापन और जीवन के असंतुलन को दर्शाती है। सौंदर्य, पर्यटन और संघर्ष के बीच का कटु यथार्थ इसमें मुखर है।
मानस का परिमल
यह कविता विकसित मानस, सद्भाव, मानवता और वैचारिक चेतना की सुगंध को रेखांकित करती है। संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर सत्य और परहित के मार्ग पर चलने का संदेश देती सशक्त रचना।
अभिव्यंजना…
यह कविता शब्दों की मर्यादा, मनकही अभिव्यक्तियों और स्मृतियों के माध्यम से प्रेम, प्रतीक्षा और चेतना के भावों को कोमलता से रचती है।
किसको ढोओगे
यह कविता सत्ता के अहंकार, चुनावी राजनीति और सामाजिक विभाजन पर तीखे सवाल खड़े करती है। “किसको ढोओगे” आम जनता की आवाज़ बनकर लोकतंत्र के मूल्यों की याद दिलाती है।
साध्वी शाश्वतप्रिया म.सा. आदि ठाणा का भव्य मंगल प्रवेश
महिदपुर रोड में साध्वी श्री शाश्वतप्रिया जी म.सा. आदि ठाणा का भव्य मंगल प्रवेश। गुरुदेव जयघोष, धर्मसभा और रतलाम चातुर्मास निमंत्रण।
सबसे खूबसूरत स्त्री
सबसे खूबसूरत स्त्री” एक सशक्त कविता है जो स्त्री के सौंदर्य को संघर्ष, दृढ़ संकल्प और अदम्य जिजीविषा के रूप में परिभाषित करती है। यह कविता स्त्री की मौन शक्ति और आत्मबल को स्वर देती है।
कलयुगी परिणय सूत्र
कलयुग में विवाह और रिश्तों के बदलते अर्थ को उजागर करती यह कविता विश्वास, वासना और टूटते संस्कारों पर तीखा प्रश्न खड़ा करती है।
