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सड़क पर घायल व्यक्ति की मदद करता हुआ संवेदनशील इंसान

मानवता..

यह कविता मानवता को एक जीवंत स्वर में प्रस्तुत करती है—जो कभी समाज की आत्मा थी, आज उपेक्षा और कठोरता के बीच संघर्ष कर रही है। फिर भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी मानवता को अपने कर्म, साहस और संवेदना से जीवित रखे हुए हैं। यह रचना पाठक को याद दिलाती है कि मानवता के बिना संसार का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।

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जन्मदिन पर परिवार के साथ खुश बच्चा, संस्कार और सादगी का संदेश

जन्मदिन की सौगात

यह बाल कविता जन्मदिन के उत्सव को केवल केक और उपहारों तक सीमित न रखकर, उसे संस्कार, सेवा और करुणा से जोड़ती है। पेड़ लगाना, पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम, बड़ों का सम्मान और सादगीपूर्ण जीवन जैसे मूल्य इस रचना को बच्चों के लिए शिक्षाप्रद और प्रेरक बनाते हैं।

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भारतीय विवाह में पारंपरिक परिधान में सजी दुल्हन

विवाह गीत

यह विवाह गीत भारतीय लोक परंपरा की मिठास लिए हुए है, जहाँ शुभ दिन का उत्सव, घर-आंगन की सजावट, ढोलक की थाप और बेटी की विदाई के भाव एक साथ पिरोए गए हैं। गीत में न केवल आनंद और मंगलकामनाएँ हैं, बल्कि बेटी के नए जीवन के लिए आशीर्वाद, संस्कार और स्नेह की कोमल अभिव्यक्ति भी है।

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इंतज़ार में डूबी प्रेमिका, जो अपने प्रिय की याद में खिड़की के पास बैठी है

तुम दूर हो या क़रीब ?

जब संवाद थम जाता है और इंतज़ार लंबा हो जाता है, तब प्रेम अपने भीतर सवालों की शक्ल लेने लगता है। यह रचना उसी असमंजस को स्वर देती है, जहाँ नज़दीकियाँ इतनी गहरी रही हैं कि दूरी का अर्थ समझ में ही नहीं आता। प्रेम में किया गया भरोसा, व्यस्तताओं के बीच पनपती बेचैनी और यह डर कि कहीं अपना व्यक्ति धीरे-धीरे दूर तो नहीं हो रहा इन्हीं भावों के बीच यह कविता पाठक को रिश्तों की सबसे कोमल और सच्ची अनुभूति से जोड़ती है।

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कुछ रंग ऐसे भी… | रिश्तों, धोखे और ख़ामोशी पर विचारशील कविता

कुछ रंग ऐसे भी…

यह कविता जीवन के उस कैनवास की कथा है, जहाँ धोखे और बनावटी रंग इतने फैल जाते हैं कि प्रेम, अपनेपन और आत्मा के रंग खो से जाते हैं, और बचती है केवल ख़ामोश उदासी।

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कठिन पहाड़ी रास्ते पर आगे बढ़ता यात्री, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक

चलता चल राही

चलता चल राही” एक प्रेरणादायक कविता है, जो बताती है कि जीवन की राह में कांटे, बाधाएँ और संघर्ष आएँगे, लेकिन रुकना नहीं बस चलते रहना ही विजय का मार्ग है।

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स्त्री जीवन और संघर्ष को दर्शाती कविता “हम सपने देख रहे हैं”

हम सपने देख रहे हैं….

“हम सपने देख रहे हैं” एक मार्मिक हिंदी कविता है, जो स्त्री के जीवन, त्याग, श्रम, घरेलू और सामाजिक संघर्ष को रोटी के प्रतीक के माध्यम से गहराई से अभिव्यक्त करती है।

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बदलता वक़्त कविता में दर्शाई गई समाज की पीड़ा और इंसानियत का क्षरण

बदलता वक़्त…

“बदलता वक़्त” एक मार्मिक हिंदी कविता है, जो टूटते रिश्तों, बढ़ती हैवानियत, अख़बारी सुर्खियों की लाल स्याही और समाज में गिरती इंसानियत को संवेदनशील शब्दों में उजागर करती है।

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