हिंदी : हिंद देश का हृदय स्पंदन 

हिंदी हिंद देश का हृदय है। यह केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और अस्मिता का ध्वज है। पौराणिक ग्रंथों की महिमा, संतों की वाणी और क्रांति के स्वर सभी हिंदी में गूँजते हैं। मां की लोरी-सी निर्मल और सभी रसों की खान यह भाषा राष्ट्र की आत्मा को स्पंदित करती है। कबीर, तुलसी, सूर, जायसी और मीरा की भक्ति की छवि इसमें झलकती है। यही कारण है कि हिंदी हमारी आन-बान-शान ही नहीं, बल्कि भारत का अभिमान है। हमें इसे केवल राजभाषा ही नहीं, बल्कि राष्ट्रभाषा का सम्मान देना चाहिए।

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हिंदी में हँसी, हिंदी में प्यार

आज हिंदी दिवस पर सबको याद दिलाएँ – अंग्रेज़ी नहीं, अपनी प्यारी हिंदी बोलें! बात करें, हँसी-मज़ाक करें और इसे दिल से अपनाएँ। क्योंकि हिंदी है हमारी भाषा, हमारी पहचान।”

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हिंदी पर बिंदी

हम सभी मिलकर हिंदी को अपना अत्यंत महत्वपूर्ण भाषा बनाना चाहते हैं। केवल अंग्रेज़ी के सहारे हमारा देश नहीं चमक सकता, इसलिए हमें हिंदी को आगे लाना होगा। आज से हम अपने सभी कार्य हिंदी में करेंगे और इसे देश की सर्वश्रेष्ठ पहचान दिलाएंगे। जब हम सभी हिंदी में संवाद करेंगे और अपने काम इसी भाषा में करेंगे, तभी देश का विकास वास्तविक रूप से संभव होगा। यह हमारा दृढ़ संकल्प है कि अंग्रेज़ी को राजभाषा मानने के बजाय हम हिंदी को अपनाएँगे और इसे सभी के बीच फैलाएँगे।

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दिलों को जोड़ती, नफरतों को तोड़ती हिंदी

हिंदी अपनी निर्बाध गति से आगे बढ़ती है और लोगों के दिलों को जोड़ती है। यह हिंदुस्तान का हृदय बनकर अपनी सरल और सहज चाल से सबको साथ लेती है। हिंदी संस्कृतियों के बीच पुल बनाती है और वर्जनाओं को तोड़ती है। यह सुहृदयजनों के भावों को अपनी ओर मोड़ती है और परंपराओं को तोड़कर नई परंपराएं बनाती है। हिंदी राम-रहीम और कृष्ण-करीम जैसी एकता को सामने लाती है, बंटी-बबली जैसी कहानियों को अपनाती है और अनेक भाषाओं के दरिया को अपनी ओर मोड़ती है। यह पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण से दिलों को जोड़ती है, प्रेम और इंसानियत को बढ़ाती है और नफरतों को दूर करती है।

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