पहला प्यार
एक साधारण-सा पोस्टकार्ड, जो जीवन के पहले प्यार की सबसे अनमोल निशानी बन जाता है। यह लघुकथा यादों और भावनाओं के उस कोमल संसार में ले जाती है, जहाँ पहला प्रेम कभी भुलाया नहीं जा सकता।

एक साधारण-सा पोस्टकार्ड, जो जीवन के पहले प्यार की सबसे अनमोल निशानी बन जाता है। यह लघुकथा यादों और भावनाओं के उस कोमल संसार में ले जाती है, जहाँ पहला प्रेम कभी भुलाया नहीं जा सकता।
जीवन के हर पहले अनुभव ख़ुशी हो या पीड़ा हमारी स्मृतियों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। यह लेख उन्हीं अमिट यादों की भावनात्मक यात्रा है।
दिल्ली से पटना की बारह घंटे की रेल यात्रा में पनपा किशोर प्रेम समाज और संस्कारों की दीवार से टकराकर दबा दिया जाता है, पर उसका मीठा दर्द शेफाली के जीवन भर उसके साथ रहता है।
यह कविता मानो खुशबुओं का एक जीवन वृत्तांत है। हर स्मृति, हर अनुभव एक विशेष सुगंध से जुड़कर अमर हो गया है। पहली बारिश की मिट्टी की महक, प्रियतम की मीठी बातों की महक, किताबों से उठती खुशबू, हाथों में महंदी की गंध, गहनों में समाया पसीना, खिड़की से आती रातरानी की महक और तन पर चंदन की सुगंध—सब कुछ उसके प्रेम और साथ के अनुभवों से गुँथा हुआ है। यह केवल प्रेम की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि उन अदृश्य अनुभूतियों का बयान है जो इंद्रियों से परे जाकर हृदय में स्थायी छाप छोड़ देती हैं। हर खुशबू, एक स्मृति बनकर जीती है और हर स्मृति में प्रेम की गहराई झलकती है।