दीदार: तेरे इश्क़ में रुसवाई और इंतज़ार की भावपूर्ण कविता

दीदार

कभी एक नज़र का दीदार पूरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी खुशी बन जाता है, तो कभी वही दीदार उम्रभर का इंतज़ार छोड़ जाता है। यह कविता मोहब्बत, बिछड़न, ख़ामोशी और अनकहे जज़्बातों की ऐसी दास्तान है, जहाँ हर शेर दिल की धड़कनों से निकलकर सीधे रूह तक पहुँचता है। प्रेम के दर्द और दीदार की तड़प को महसूस कराती यह रचना हर प्रेमी के मन की आवाज़ बन जाती है।

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इंतज़ार

ज़िंदगी ने बस इतना ही सिखाया है कि इंतज़ार भी एक उम्र माँगता है। न जाने कितनी रातें, कितने दिन तेरी याद में गुज़र गए। खामोशी बहुत कुछ कहती है, पर जब दिल नहीं समझ पाता, मैं फ़िज़ाओं के बीच आकर तेरे दीदार की आस लगा बैठता हूँ। अब तो ये हवाएँ भी थकी-सी लगती हैं .मानो ये भी चाहती थीं कि एक दिन मेरी खामोशी मुस्कान में बदल जाए।

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