गुलमोहर और रजनीगंधा
गुलमोहर का रंग और रजनीगंधा की खुशबू प्रेम के दो अलग-अलग रूपों जैसे हैं. एक में जुनून है, दूसरे में प्रतीक्षा और दोनों में एक-दूसरे में बने रहने का एहसास.

गुलमोहर का रंग और रजनीगंधा की खुशबू प्रेम के दो अलग-अलग रूपों जैसे हैं. एक में जुनून है, दूसरे में प्रतीक्षा और दोनों में एक-दूसरे में बने रहने का एहसास.
नगर-सीमान्त पर जहाँ मेरा बसेरा है, उसके ठीक सामने पलाश का एक पेड़ है… जब से उस पर पलाश के अंगारे खिले हैं, मन शरविद्ध हरिण की भाँति बार-बार वहीं चला जाता है। जैसे फूल रौशनी हों। और फूलों का न होना रात्रितिमिर, जिसमें पेड़ आँख से ओझल हो जाएं… वसंत से बड़ा निर्मोही कौन है?