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अनुराग और आत्मप्रेम की अनुभूति को दर्शाती भावपूर्ण हिंदी कविता 'मेरा अनुरागी मन'

‘मेरा अनुरागी मन’

‘मेरा अनुरागी मन’ आत्मप्रेम, अनुराग और जीवन में प्रेम के पुनर्जागरण की एक संवेदनशील कविता है। इसमें वैराग्य से श्रृंगार तक की भावयात्रा, बसंत की तरह लौटती मुस्कान और भीतर बसे दिव्य प्रेम का सुंदर चित्रण किया गया है।

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विरह

निशा की नीरवता में बैठी नायिका प्रतीक्षा में लिपटी है .हवा में भीगी चाँदनी, शरीर पर ओस की बूँदें जैसे भावना का स्पर्श कर रही हों। वह प्रिय के आगमन की राह में सजी-संवरी है, मानो सावन स्वयं प्रेम का संदेश लेकर आया हो। मन में उमड़ती आशाओं से मोतियों का हार पिरोती, पलकें प्रतीक्षा की लाली से भीग उठी हैं।

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