मैं कविता हूँ…
मैं कविता हूँ” केवल शब्दों की रचना नहीं, बल्कि जीवन की अनुभूतियों का स्वीकार है। दुख, सुख, प्रकृति और समय के बीच कविता स्वयं को खोजती और सदा जीवित रहती है।

मैं कविता हूँ” केवल शब्दों की रचना नहीं, बल्कि जीवन की अनुभूतियों का स्वीकार है। दुख, सुख, प्रकृति और समय के बीच कविता स्वयं को खोजती और सदा जीवित रहती है।
“वे लौटेंगे” एक प्रभावशाली कविता है जो बिखरे हुए लोगों के फिर से संगठित होकर अन्याय के खिलाफ खड़े होने की उम्मीद को स्वर देती है। यह रचना संघर्ष, एकता और मानवता के बीज बोने की बात करती है। कविता बताती है कि जो लोग दिशाओं में बिखर गए हैं, वे एक दिन फिर लौटेंगे भूख, पीड़ा और अन्याय को मुट्ठी में भींचकर, एक स्वर और एक आवाज़ बनकर।
यह रचना प्रेम, स्मृति और इंतज़ार की मार्मिक कथा है। प्यार में पागल एक लड़की, जो समय के साथ आगे बढ़ गई है, लेकिन वादों की स्मृतियाँ आज भी बस स्टॉप पर खड़ी मिलती हैं। शीशा, काजल, मुस्कान और हर आती बस सब मिलकर अधूरे प्रेम और लौटकर न आने वाले वादे की एक संवेदनशील कविता रचते हैं।
यह कविता प्रेम, पहचान और आत्मिक संवाद की कोमल अभिव्यक्ति है। ‘अजनबी’ और ‘सांवरे’ के प्रतीकों के माध्यम से कवि मन की उस यात्रा को शब्द देता है, जहाँ नादानी, तलाश और समर्पण एक-दूसरे में घुल जाते हैं। प्रेम यहाँ केवल सांसारिक नहीं, बल्कि भक्ति और आत्मा का स्वर बन जाता है। मन की भटकन, चित की चोरी और ऋतु प्रीत की सुगंध के साथ यह रचना पाठक को भीतर तक छूती है और उसे अपने ही भावलोक में ले जाती है।
श्मशान की राख से लौटकर जब ज़िंदगी की जिम्मेदारियाँ बाँहों में भर ली जाती हैं—तब यह कविता मृत्यु से आँख मिलाकर जीवन को चुनने का साहस बन जाती है।
लहरों, तूफ़ानों और गहराइयों के माध्यम से सागर से संवाद करती यह कविता जीवन के संघर्ष, धैर्य और हर हार के बाद नई शुरुआत का साहस देती है।
ह कविता क्रिकेट के मैदान में उतरती लड़कियों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण, आत्मविश्वास और सामाजिक रूढ़ियों के टूटने की कथा कहती है। चौके-छक्कों से लेकर इतिहास रचने तक, यह रचना बताती है कि खेल कैसे करोड़ों लड़कियों के भीतर साहस और आकाश छूने की आकांक्षा जगा रहा है।
यह कविता न बचपन और न जवानी की उस मध्यांतर अवस्था को स्वर देती है, जिसे किशोरावस्था कहा जाता है। बदलती आदतों, माता-पिता की अपेक्षाओं और सामाजिक दबावों के बीच फँसे किशोर मन की उलझन और पीड़ा को यह रचना संवेदनशील ढंग से अभिव्यक्त करती है।