“यमराज की उलझन: अनुपम या अनुपमा?”

वो भैंसा बुरी तरह से थक चुका था , बुरी तरह से हांफ रहा था ! उसके नथुनों से भर्र भर्र की आवाज़ आ रही थी ! हालाकिं वह कोई ऐरागैरा भैंसा नहीं था , वह तो यमराज़ जी का भैंसा था ! एक तो ग्रीष्म काल की गर्मी , ऊपर से यमराज जी की…

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शांतता… पुणेकर वाचत आहेत

पुणे शहर और पिंपरी-चिंचवड़ मंगलवार, ९ दिसंबर को एक ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने जा रहे हैं्. पुणे पुस्तक महोत्सव २०२५ के अंतर्गत आयोजित विशेष उपक्रम ‘शांतता… पुणेकर वाचत आहेत’ में आज सुबह ११ से १२ बजे के बीच पूरा शहर एक साथ पुस्तक पढ़ने के अनोखे प्रयोग में सहभागी होने वाला है. इस एक घंटे के वाचन समारोह के माध्यम से पुणे विश्‍व रिकार्ड बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएगा.

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बेंगलुरु स्टूडियो परिसर में तालाब के पास खड़ा बच्चा, मैटरनिटी फोटोशूट हादसे की प्रतीकात्मक तस्वीर

कैमरा चलता रहा, जिंदगी थम गई

बेंगलुरु के एक निजी स्टूडियो में मैटरनिटी फोटोशूट के दौरान तीन साल के मासूम की तालाब में डूबने से मौत हो गई. सात माह की गर्भवती मां शूट में व्यस्त थी, तभी खेलते-खेलते बच्चा परिसर के तालाब में गिर गया. यह दर्दनाक हादसा सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है.

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विदाई गीत

आज विदाई का वह क्षण है, और मैं यहाँ अकेला खड़ा हूँ, यह सोचते हुए कि क्या कहूँ और शब्दों का सही चयन कैसे करूँ। मेरी आँखें भर आती हैं जब मैं अपने विद्यालय में पहले दिन की यादों को याद करता हूँ—वो उत्साह, वो नर्वसनेस, और दोस्तों के साथ की छोटी-छोटी शरारतें, जैसे क्लास में बंक मारना या किसी का टिफ़िन चुपके से ले जाना। वे निश्चिन्त, हँसी-खुशी भरे पल, दोस्तों के साथ की मस्ती, टीचरों को चिढ़ाना, खेल के मैदान और प्रार्थना की ध्वनि—ये सभी यादें हमेशा मेरे दिल में रहेंगी।

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मुआवज़ा

गंगा घाटी की बाढ़ ने न जाने कितने घर उजाड़ दिए। लोचू के पिता भी उसी बाढ़ में लापता हो गए। तीन दिनों से परिवार उनकी खोज में भटक रहा था। घर में मातम था, पर जब टीवी पर “मुआवज़े” की खबर चली — 94 लाख रुपए का — तो लोचू की प्रार्थना बदल गई। अब उसके भगवान से माँग पिता की सलामती नहीं, बल्कि मुआवज़े की रकम की थी।

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बहू नहीं कोई देवी हो

यह कहानी नारी के कर्तव्य, परिश्रम और ससुराल में सम्मान पाने की प्रेरक कहानी है। नीरा, स्वभाव से मेहनती, संवेदनशील और न्यायप्रिय, अपने सास-ससुर के प्रति समर्पित रहती है। शादी के बाद पति के ड्यूटी पर चले जाने के बावजूद वह अपने कर्तव्यों से विमुख नहीं होती।

कठोर व्यवहार और अन्याय के बावजूद नीरा अपने नेकनीयती और परिश्रम से अपने सास-ससुर को उचित सम्मान दिलाती है। उसके इस समर्पण और अपनापन को देखकर परिवार और समाज भी उसे आदर और सम्मान देने लगते हैं। कहानी में नारी शक्ति, सशक्तता और पारिवारिक प्रेम का संदेश प्रमुख रूप से उजागर है।

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घर के आँगन में अकेला बैठा वृद्ध पिता, हाथ में बेटी की पुरानी तस्वीर, चेहरे पर दर्द और आँखों में नमी, पृष्ठभूमि में खाली दरवाज़ा और सांझ का धुंधलका।

भागी हुई बेटी का पिता

एक बेटी के घर छोड़ जाने के बाद पिता के मन में उठने वाले अपराधबोध, गुस्से, सामाजिक अपमान और अंततः प्रेम की स्वीकृति का बेहद मार्मिक चित्रण। यह कविता केवल एक पिता की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय समाज की जटिल मानसिकता और रिश्तों की गहरी पड़ताल है।

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व्यथा वृक्ष की…

कविता वृक्ष की पीड़ा और धैर्य का जीवंत चित्र खींचती है। गहरी जड़ों वाला यह वृक्ष कई अत्याचार और आघात सहकर भी खड़ा है। उसका कोमल तन और मन भले ही पत्ते-पत्ते, रेशा-रेशा झर गया हो, पर वह पूरी तरह टूटा नहीं। जर्जर होने के बाद भी वह आशा से भरा है कि उसकी शाखाओं पर फिर से नवकोपलें फूटेंगी, हरा-भरा जीवन लौटेगा।
वह स्वयं से प्रश्न करता है कि आखिर उसने क्या ग़लत किया था—सबको आसरा देकर, फल-फूल देकर, उदर-तृप्ति कराकर भी क्यों आहत होना पड़ा? पर साथ ही उसमें यह अटूट विश्वास है कि उसका अस्तित्व ही धरती के जीवन का आधार है। वह मनुष्यों को स्मरण कराता है—यदि वे उसे पोषित करेंगे तो बदले में वह उन्हें संरक्षण देगा।

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जीवन, प्रकृति और अनुभूति पर आधारित हिंदी कविता “मैं कविता हूँ” का भावात्मक चित्र

मैं कविता हूँ…

मैं कविता हूँ” केवल शब्दों की रचना नहीं, बल्कि जीवन की अनुभूतियों का स्वीकार है। दुख, सुख, प्रकृति और समय के बीच कविता स्वयं को खोजती और सदा जीवित रहती है।

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रिलीज से पहले ‘द केरल स्टोरी 2’ पर हाईकोर्ट की रोक. सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया पर उठे सवाल

रिलीज से पहले झटका. हाईकोर्ट ने रोकी द केरल स्टोरी-2

केरल हाईकोर्ट ने ‘द केरल स्टोरी 2’ की रिलीज पर अंतरिम रोक लगाई. अदालत ने सीबीएफसी के सर्टिफिकेशन पर सवाल उठाते हुए दो हफ्ते में आपत्तियों पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया.

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