छोटी दुकान के सामने खड़े सफल व्यापारी योगेंद्र पोरवाल, संघर्ष से सफलता की प्रेरक कहानी

जिंदगी में बदलाव जरूरी है

यह प्रेरक कहानी योगेंद्र पोरवाल की है, जिन्होंने मात्र 16 वर्ष की उम्र में पिता के निधन के बाद जिम्मेदारियाँ संभालीं और छोटी सी दुकान से सफर शुरू किया। समय के साथ बदलाव अपनाते हुए उन्होंने संघर्ष, मेहनत और दूरदर्शिता से 30 वर्षों में सफलता की मजबूत पहचान बनाई।

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रंगों से सजा जीवन

लाल बिंदी की ममता हो या आसमां का नीला सुकून — हर रंग जीवन को एक नई दिशा देता है। हर रंग अपनी कहानी कहता है, और इन्हीं रंगों से जीवन सच में पूर्ण बनता है।”

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हिंसा और अहिंसा

हिंसा और अहिंसा केवल शब्द नहीं, बल्कि मनुष्य की सोच और कर्म की दिशा हैं। कोई शरीर को मारता है, कोई मन को—और दोनों ही पीड़ा छोड़ जाते हैं। जो तड़पते को देखकर भी अकड़ जाए, वही सच्ची हिंसा है; और जो बिना कहे दुख हर ले, वही अहिंसा। जीवन की असली परीक्षा वहीं है, जहाँ करुणा सवाल बनकर खड़ी हो जाती है।

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सीधा सा गणित: बहू और ससुर के रिश्ते की भावुक हिंदी कहानी

सीधा सा गणित

‘सीधा सा गणित’ एक मार्मिक पारिवारिक कहानी है, जिसमें बहू के परिश्रम को अनदेखा कर दिया जाता है, लेकिन ससुर के स्नेहपूर्ण व्यवहार से रिश्तों की असली गरिमा सामने आती है। यह कहानी परिवार, सम्मान और प्रेम का सुंदर संदेश देती है।

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पहले झगड़े थे, आज दूरी

हर इंसान अलग है उसकी सोच, सहने की क्षमता, बोलने का तरीका और चुप्पी की भाषा भी अलग होती है। फिर भी हम एक-दूसरे में खामियाँ खोजने लगते हैं और यही खामियाँ धीरे-धीरे रिश्तों में दूरी बना देती हैं। आज परिवार छोटे हो गए हैं, लेकिन दिलों के फासले बढ़ गए हैं। जहाँ पहले प्रेम और सम्मान झगड़ों पर भारी पड़ते थे, आज अहंकार और असहिष्णुता रिश्तों को तोड़ रही है। साथ रहते हुए भी अकेले हो जाना, शायद हमारे समय की सबसे बड़ी त्रासदी है।

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पिताजी और शिक्षक दिवस

मेरे लिए पिताजी ही जीवन के पहले शिक्षक थे। उनकी डाँट में करुणा थी और उनकी कठोरता में भी प्रेम छिपा था। उन्होंने केवल पढ़ाया नहीं, बल्कि सच्चाई, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ जीना सिखाया। अद्भुत संयोग यह रहा कि शिक्षक होकर वे इसी शिक्षक दिवस के दिन इस संसार से विदा हुए—और अपने जीवन से यह अंतिम संदेश छोड़ गए कि सच्चा शिक्षक वही है, जो अपने आचरण और आदर्श से पीढ़ियों को दिशा देता है।

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सिगड़ी के पास सिमटी यादें

सिगड़ी की गर्माहट, मैया का स्नेह, ताई जी का अनुशासन और मम्मी की टोका-टाकी संयुक्त परिवार के वे दिन आज भी दिल को छू जाते हैं। यह संस्मरण बचपन, संस्कार और रिश्तों की उस दुनिया में ले जाता है, जहाँ हर सीख स्नेह के साथ मिली।

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त्यौहार : खुशी की साझा भाषा

त्यौहार खुशी की साझा भाषा हैं, जो धर्म और परंपराओं से ऊपर उठकर लोगों को जोड़ते हैं। सोशल मीडिया के दौर में आवश्यकता है कि हम भिन्नताओं का सम्मान करते हुए, एक-दूसरे की खुशियों में सहभागी बनें और “जियो और जीने दो” के सिद्धांत को अपनाएँ।

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