Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
बरसात के बीच गाँव की पगडंडी पर खड़ी एक युवती, दूर से आते प्रियजन के साथ प्रेम और सुकून का भाव, बादलों के बीच उभरता इंद्रधनुष और हरियाली से भरा शांत वातावरण

इंद्रधनुष सा प्रेम

यह कविता प्रेम की उस गहराई को व्यक्त करती है, जो केवल भावनाओं तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन के हर दर्द को सहेजकर उसे सुकून में बदल देती है। प्रिय का साथ मानो सावन की पहली बारिश की तरह है, जो तपती हुई धरती यानी थके हुए मनको ठंडक और नई ऊर्जा देता है।

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“शाम के धुंधले माहौल में अकेला शख्स इश्क़ के ख्यालों में डूबा हुआ”

इब्तिदा-ए-इश्क

इश्क़ एक ऐसा एहसास है जो शब्दों से परे होते हुए भी कविता में सबसे खूबसूरत ढंग से व्यक्त होता है। “इब्तिदा-ए-इश्क” इसी एहसास की एक झलक है, जहाँ अधूरापन भी एक मुकम्मल कहानी का हिस्सा बन जाता है।

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स्वाभिमान

हर रोज मैट्रो स्टेशन पर भीख मांगती वह अंधी भिखारन मेरी नजरों के सामने होती।
एक दिन उसकी तबियत ठीक न होने पर मैंने देखा कि उसकी देखभाल एक जवान लड़की कर रही थी। कई सालों के दर्द और असहायता के बावजूद, उस बच्ची ने उसकी सेवा को अपना स्वाभिमान बना लिया। भीख मांगना नहीं, बल्कि सहयोग और मानवता की यही असली पहचान है।

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75 इयर्स ऑफ NDA डॉक्यूमेंट्री को राष्ट्रीय पुरस्कार

’75 इयर्स ऑफ NDA’ डॉक्यूमेंट्री को राष्ट्रीय पुरस्कार

पुनीत बालन स्टूडियोज़ की डॉक्यूमेंट्री ’75 इयर्स ऑफ NDA’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में बड़ी सफलता मिली है। डॉक्यूमेंट्री के संपादक मनवीर जसरोटिया को गैर-फीचर फिल्म श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ संपादन का राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया। यह डॉक्यूमेंट्री पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के 75 वर्षों के गौरवशाली इतिहास, अनुशासन, नेतृत्व और भारतीय सशस्त्र बलों के लिए उसके अमूल्य योगदान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।

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संघर्ष, हौसला और सफलता की प्रेरक हिंदी कविता

खुद को पाया, खुद को ही खोकर

ज़िंदगी का हर संघर्ष हमें कुछ नया सिखाता है। ठोकरें, असफलताएँ और कठिन रास्ते इंसान को तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि उसे और मज़बूत बनाने के लिए आते हैं। “खुद को पाया, खुद को ही खोकर” एक ऐसी प्रेरणादायक हिंदी कविता है, जो हौसले, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास की कहानी कहती है। यह रचना बताती है कि मंज़िल तक वही पहुँचता है, जो दर्द, काँटों और तूफ़ानों से हार मानने के बजाय उनसे सीखकर आगे बढ़ता है।

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मैं कलम हूँ

“मैं कलम हूँ” एक प्रेरणादायक कविता है जो कलम की शक्ति, सच्चाई और अभिव्यक्ति के महत्व को उजागर करती है। यह कविता बताती है कि शब्दों में दुनिया बदलने की ताकत होती है।

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जब बदरा रोया…

यह कविता प्रकृति के विनाश पर चिंता और संरक्षण का संदेश देती है। कवि दिखाता है कि जब पर्यावरण आहत होता है, तो धरती की सुंदरता और जीवन का संतुलन दोनों बिगड़ जाते हैं। वह मानव से आग्रह करता है कि जंगल बचाए, प्रदूषण रोके और संसाधनों का संयमित उपयोग करे। अंत में कवि आशा जताता है कि यदि हम प्रकृति से प्रेम करें और उसकी रक्षा करें, तो धरती फिर से हरियाली, सुगंध और आनंद से भर जाएगी।

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सीता और राम के प्रेम, विरह और भावनात्मक संघर्ष को दर्शाती यथार्थवादी साहित्यिक छवि

मैं सिया सी… और तुम राम

प्रेम जब विश्वास मांगता है और रिश्ते परीक्षा लेने लगते हैं, तब सिया के मन में राम से कई अनकहे सवाल जन्म लेते हैं। यह कविता उसी प्रेम, पीड़ा, विरह और स्त्री के आत्मसम्मान की मार्मिक अभिव्यक्ति है।

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 युगान्तर

उस दौर में जीवन के उपन्यास पर हस्ताक्षर करना इतना आसान नहीं था, जैसे आज है। मानो जैसे अंगारों पर चलना हो। फिर भी उसे सच बताना पड़ा और मुझे सच छुपाना पड़ा। वह एक संपूर्ण प्रेम-ग्रंथ था और मैं पाँच कोस की बदलती बोली। जीवन के कोरे कागज़ पर उसने मनमर्ज़ियाँ लिखीं और मैंने बंदिशें। कागज़ और स्याही किसी के पास नहीं थे, बस अनाम सी एक उड़ान थी। यक़ीन के साहिल पर वह ठहरा रहा और मैं वक़्त की नज़ाकत में बहती चली गई। उसने चक्रव्यूह की सलाखें तोड़ दीं, जबकि मैं सही और ग़लत के भँवर में उलझती रही। उसके लिए फ़ासले और फ़ैसले कम थे, मगर मेरे लिए वही बहुत भारी थे—कभी वक़्त के और कभी दहलीज़ के।

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माँ सरस्वती वंदन | ज्ञान और विद्या पर सुंदर कविता

माँ सरस्वती वंदन

ज्ञान, विद्या, संगीत और संस्कृति की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती को समर्पित यह भावपूर्ण वंदना श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का सुंदर काव्यात्मक स्वर है। कविता में माँ सरस्वती के दिव्य स्वरूप, उनके ज्ञानमय आशीर्वाद और मानव जीवन में उनके महत्व का भावपूर्ण वर्णन किया गया है।

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