Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

जीत

हार को स्वीकार करने का साहस ही सच्ची जीत की शुरुआत होता है। जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अपना संयम और आत्मविश्वास बनाए रखता है, वही आगे चलकर मंज़िल तक पहुँचता है। रास्ते आज कठिन लग सकते हैं, पर यदि हौसलों से भरी कोशिश जारी रहे तो कल वही रास्ते सफलता की ओर ले जाते हैं। गिरना जीवन का स्वभाव है, पर हर बार गिरकर उठना और फिर आगे बढ़ना ही संघर्ष की असली पहचान है।

Read More
ग्रामीण स्त्री, श्रम और विस्थापन के प्रतीकों के साथ सामाजिक यथार्थ दर्शाती हिंदी कविता का दृश्य

वसंत नहीं लौटता

यह कविता बसंता और वसंत के प्रतीक के माध्यम से श्रम, विस्थापन और जीवन के असंतुलन को दर्शाती है। सौंदर्य, पर्यटन और संघर्ष के बीच का कटु यथार्थ इसमें मुखर है।

Read More
एक महिला रात में टीवी देखते हुए अतीत की यादों में खोई हुई है, उसके चेहरे पर हैरानी और भावनात्मक तनाव साफ दिखाई दे रहा है।

अब क्या होगा -3

एक सस्पेंस और इमोशनल हिंदी कहानी रीता मिश्रा तिवारी भागलपुर लाइट ऑन करने पर देखा तो दरवाजे पर गिरी पड़ी थी शेफाली..!आवाज़ लगाई पर कोई हरकत नहीं। पानी का छींटा मारा..!” क्या कर रही पागल हो गई है..जगा दिया कितना प्यारा सपना देख रही थी”हड़बड़ा कर उठ बैठी शेफाली। “थैंक गॉड मेरी तो जान ही…

Read More
चाइनीज मांझे से मौत अब हत्या, लखनऊ केस से भड़के सीएम योगी,

चाइनीज़ मांझा बना कातिल

उत्तर प्रदेश में अब चाइनीज़ मांझे से होने वाली मौत को सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि हत्या माना जाएगा| मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस जानलेवा मांझे को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि ऐसे मामलों में मर्डर का केस दर्ज किया जा सकता है|

Read More

सवाल मैं, जवाब में सन्नाटा

वो सबके लिए मोहब्बत बरसाता है, लेकिन मुझे किसी तमाशे की तरह अनदेखा कर देता है। उसकी रहमतें जब हर गली को भिगोती हैं, तब भी मैं सूखी ही रह जाती हूँ। जिसे कभी पलकों पर बिठाया था, वही मेरी आँखों में कांटे चुभो जाता है। मैं अपने सवालों में उलझी रहती हूँ, और वो जवाबों में सन्नाटा छोड़ जाता है। दूसरों की ज़िंदगी में वो सौ रंग भर देता है, मगर मेरे हिस्से हमेशा अंधेरा ही आता है। वो खुद भीड़ का हिस्सा बनकर चल पड़ता है, और मुझे तन्हाई में छोड़ जाता है। जब भी लौटता है शहर से, “गौरी”, तो बस उदासी का कोई नया किस्सा दे जाता है।

Read More

प्रेम में…

प्रेम जब आया, तो स्त्री न केवल पत्नी रही, न प्रेयसी वह मां बन गई, धारण करने वाली, संभालने वाली। पुरुष भी न प्रेमी बन सका, न पूरा आदमी; वह तो जैसे शिशु हो गया, स्नेह और सहारे पर टिका हुआ। प्रेम ने पशु से भी पशुत्व छीन लिया और वह संत-सा शांत और सहज हो उठा। तब लगा, प्रेम कोई साधारण भाव नहीं यह क्रांति है,

Read More
आत्मविश्वास से खड़ा व्यक्ति, चुनौतियों के बीच सफलता की ओर बढ़ता हुआ

“जिद से पहचान”

बदनाम से पहचान तक” एक गहरी भावनात्मक हिंदी ग़ज़ल है, जो इंसान के संघर्ष, आत्मसम्मान और समाज की बदलती सोच को दर्शाती है। यह ग़ज़ल बताती है कि जीवन में बदनामी या असफलता अंत नहीं होती, बल्कि वही हमारे लिए एक नई पहचान बनाने का अवसर बनती है। आज के दौर में जब लोग अक्सर दूसरों के बारे में जल्दी राय बना लेते हैं, यह रचना हमें धैर्य, मेहनत और आत्मविश्वास का महत्व सिखाती है।

Read More
स्टेशन पर विदा होते राघव और रिद्धिमा, आँखों में प्रेम और बिछड़ने की नमी

वो तीन दिन

तीन दिन, एक शहर और उम्र भर की यादें” राघव और रिद्धिमा की ऐसी भावनात्मक प्रेम कहानी है, जिसमें एक छोटी-सी मुलाकात जीवनभर की स्मृतियों में बदल जाती है। अदरक वाली चाय, मेहंदी में छिपा नाम, छत पर बिताई तारों भरी रात और स्टेशन पर बिछड़ने का दर्द ये छोटे-छोटे पल उनके रिश्ते की सबसे बड़ी पूंजी बन जाते हैं। यह कहानी बताती है कि सच्चे रिश्तों में दूरी मायने नहीं रखती, क्योंकि कुछ मुलाकातें समय से नहीं, दिल से जुड़ी होती हैं।

Read More
उज्जैन में सिंहस्थ मेले की तैयारियों के तहत बनाए जा रहे पार्किंग स्थल का दृश्य, जहां बड़ी संख्या में वाहनों के लिए व्यवस्थित जगह चिन्हित की गई है और अधिकारी निरीक्षण करते नजर आ रहे हैं.

सिंहस्थ में पार्किंग व्यवस्था पर प्रशासन का फोकस

सिंहस्थ मेले की तैयारियों में प्रशासन ने पार्किंग व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए नए स्थल चिन्हित किए हैं. मक्सी रोड की पार्किंग को धतरावदा शिफ्ट करने पर विचार किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को घाट तक कम दूरी तय करनी पड़े.

Read More