शिक्षण संस्थान बन रहे मौत के घर

देश के कई शिक्षण संस्थान छात्रों के लिए बेहतर जीवन जीने के पाठ सीखने की जगह कम, मौत के घर ज्यादा बनते जा रहे हैं।

छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं समाज की उम्मीदों और नियमों के नीचे दबी खामोश पीड़ा के संकेत हैं।बच्चों को यह नहीं सिखाया जाता है कि असफलता, निराशा या अनिश्चितता से कैसे निपटना है। उन्हें सिर्फ परीक्षाओं के लिए तैयार किया जाता है, जिंदगी के लिए नहीं।

 इन घटनाओं को अब नजर अंदाज नहीं किया सकता है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से कई बार हिदायतें दी जाती रही हैं लेकिन इस समस्या का समाधान अभिभावक और शिक्षण संस्थानों को भी मिल कर खोजना होगा। क्योंकि मुफ्त में युवा जानें जा रही हैं।

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पश्चिम रेलवे के 11 कर्मचारी महाप्रबंधक संरक्षा पुरस्कार से सम्मानित

पश्चिम रेलवे ने सुरक्षित रेल परिचालन में सतर्कता और समर्पण का परिचय देने वाले 11 कर्मचारियों को महाप्रबंधक संरक्षा पुरस्कार से सम्मानित किया, जिनकी सजगता से संभावित दुर्घटनाएं टल सकीं.

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खिड़की के पास शांत बैठी एक भारतीय महिला, चेहरे पर हल्की उदासी, पीछे धुंधला पारिवारिक माहौल और जिम्मेदारियों का प्रतीक दृश्य।

वो हँसती थी… अब चुप रहती है

“वो लड़की जो छोटी-छोटी बातों पर हँसती थी, धीरे-धीरे जिम्मेदारियों के बोझ तले चुप होना सीख गई।
यह सिर्फ एक स्त्री की कहानी नहीं, उन अनगिनत लड़कियों की सच्चाई है जो सबकी बनते-बनते खुद को कहीं पीछे छोड़ देती हैं।”

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साहित्य कला चौपाल द्वारा सम्मान समारोह संपन्न

पुराना कोर्ट परिसर में 15 अगस्त 2025 को सायं 4:30 बजे से स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर काव्य मंच साहित्य कला चौपाल के बैनर तले एक गरिमामय सम्मान समारोह सह काव्य गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का संयोजन मंच की संस्थापक-अध्यक्ष अनीता सिंह, महासचिव कृष्णा दीदी एवं सचिव निवेदिता श्रीवास्तव गार्गी के नेतृत्व में हुआ. कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विद्या वाचस्पति सम्मान के अंतर्गत साहित्यकारों का सम्मान रहा. हरिद्वार में प्राप्त इस प्रतिष्ठित सम्मान की निरंतरता स्वरूप तीन वरिष्ठ साहित्यकारों सविता सिंह मीरा, निवेदिता श्रीवास्तव गार्गी एवं अरविंद तिवारी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया.

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बगुलाभगत

तुमने मित्रता का हाथ बढ़ाया और मैंने उसे सच्चे मन से स्वीकार भी किया। यह अनुभव मुझे एक नई ख दे गया – कि हर नए मित्र को परखकर ही अपनाना चाहिए। तुम्हें यह भ्रम रहा कि तुम्हारी मित्रता मुझे जीवन भर अभिमान देगी, लेकिन धीरे-धीरे मैं समझने लगी कि मित्रता में स्वार्थ छिपा होता है और उसका सत्य अक्सर कटु होता है।
तुम्हारी खट्टी-मीठी बातें, दिखावे की आवभगत और गरिमामयी उपस्थिति मुझे किसी बगुला भगत से कम नहीं लगी। मेरी बेरंग जिंदगी में रंग भरने की तुम्हारी कोशिश झूठी थी, और प्रेम प्रसंगों की ठिठोली मेरी आस्था को भीतर ही भीतर जला रही थी। तुम्हारी झूठी तारीफें, बनावटी शानोशौकत और ऊँची-ऊँची बातें मेरी अस्मिता पर आघात कर रही थीं। मेरे कंधे तुम्हारे सपनों का बोझ ढोते रहे, और तुम्हारी प्रसिद्धि की लालसा मेरी आहुति को प्रश्नांकित करती रही। तब मैंने जाना कि तुम्हारी मित्रता सच में कफन जैसी सफेद और मौत जैसी ठंडी है।

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बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड पर अब फिल्म बनेगी

इंदौर के बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड पर अब फिल्म बनने जा रही है। फिल्म का नाम फिलहाल ‘हनीमून इन शिलॉन्ग’ रखा गया है, जिसका निर्देशन करेंगे एस.पी. निंबावत। मंगलवार को वे इंदौर पहुंचे और राजा रघुवंशी के परिजनों से मुलाकात कर अधिकारिक अनुमति ली।

परिवार को उम्मीद है कि इस फिल्म के ज़रिए मेघालय की बिगड़ी हुई छवि सुधरेगी। फिल्म की 80% शूटिंग इंदौर में और 20% शूटिंग शिलॉन्ग में की जाएगी।

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रसोई में आम पापड़ बनाती हुई माँ और पास बैठा बच्चा, बचपन की यादों और ममता को दर्शाता भावुक दृश्य।

ख़ुशबू माँ के साथ की

यह कविता माँ के साथ बिताए गए उन अनमोल पलों की स्मृतियों को सजीव करती है, जहाँ ममता, त्याग, अनुशासन और प्रेम की खुशबू हर शब्द में महसूस होती है।

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दिल को छूती मौन की गूँज…

“निशिगंधा की महक से जग उठा संसार, आंखों में बह रही गंगा और यमुना की धाराएँ। मिट्टी के दीपों की रौशनी में प्रार्थना और शांति पंचतत्व में विलीन हो रही हैं, और एक गीत हर दिल को छूते हुए गूँज रहा है।”

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भागलपुर में गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित गांधी स्मृति यात्रा सम्मान समारोह का दृश्य

महात्मा गांधी आगमन की शताब्दी पर राष्ट्रीय समारोह

भागलपुर में महात्मा गांधी के आगमन की शताब्दी पर राष्ट्रीय स्तर पर बहुआयामी समारोह आयोजित किए जाएंगे। गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र गुप्ता ने घोषणा करते हुए बताया कि कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को गांधी के विचारों और मूल्यों से जोड़ा जाएगा। झारखंड तक निकली गांधी स्मृति यात्रा में प्रो. मनोज कुमार, डॉ. मनोज मीता और प्रसून लतांत सहित कई गांधीवादी कार्यकर्ता शामिल रहे।

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अधूरी ख्वाहिश..

गर्मी के एक दोपहर में, सुदीप बनर्जी के अंतिम संस्कार की तैयारी हो रही है। निधि, जो अपने पति अमितेश के उपेक्षात्मक और हिंसक व्यवहार से वर्षों से जूझ रही है, यह घोषणा करती है कि मुखाग्नि सुदीप का बेटा सुजीत देगा—एक सच्चाई जिसे अब तक कोई नहीं जानता था। विरोध और संदेह के बावजूद, निधि यह साबित करने पर अडिग रहती है कि सुजीत सुदीप का खून है।

सुदीप के गुजरने के बाद, निधि को उसकी एक रिकॉर्डेड ऑडियो क्लिप मिलती है, जिसमें वह अपनी आखिरी ख्वाहिश व्यक्त करता है—कि निधि उसकी मृत्यु के बाद भी उसके नाम का सिंदूर लगाए और उसकी पत्नी की तरह जीवन बिताए। निधि इस इच्छा को उसी रात पूरी करती है।
कुछ दिन बाद, वकील की उपस्थिति में सुदीप की वसीयत पढ़ी जाती है, जिसमें उसकी सारी संपत्ति निधि और उसके बाद सुजीत के नाम की जाती है, और निधि से कहा जाता है कि वह उसकी विधवा नहीं बल्कि सुहागन की तरह इस घर में रहे। यह सब सुनकर सुदीप की माँ निधि को अपनाती है और अपने पोते को गले लगाती है। यह क्षण एक रिश्ते के खोने के दर्द के साथ-साथ नए अपनत्व और स्वीकृति के सुख को भी दर्शाता है।

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