Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

रंगोली

दिवाली नज़दीक थी, और हर साल की तरह श्रद्धा को ससुराल में ही त्योहार मनाना था, जबकि उसका मायका दो गली छोड़कर ही था। शादी के बाद से उसने कभी भी दिवाली के दिनों में माँ के आँगन में रंगोली नहीं बनाई, क्योंकि सास को उसका मायके जाना पसंद नहीं था। हर दिन वह ससुराल के आँगन में रंगोली बनाती, पर मन माँ के खाली आँगन में बसता, जहाँ अब रौनक खत्म हो चुकी थी। एक-दो बार मायके जाकर उसने देखा कि माँ आसपास के बच्चों से छोटी-सी रंगोली बनवाती हैं, पर न माँ ने उससे आने को कहा, न वह कह पाई। बात छोटी थी, पर कहने की हिम्मत आज तक नहीं जुटा पाई। उसे हमेशा यह दर्द रहा कि वह बेटी होकर भी अपने घर जाने के लिए ससुरालवालों की अनुमति पर निर्भर है—शायद इसी वजह से लोग बेटा मांगते हैं, क्योंकि बेटियाँ शादी के बाद अपने ही घर के लिए पराई हो जाती हैं।

Read More
शिव पार्वती का दिव्य मिलन दर्शाती भावपूर्ण हिंदी कविता, तप और समर्पण का प्रतीक

आत्मा का समर्पण

हिमालय की गोद में जन्मी पार्वती के मन में केवल महादेव का ही नाम बसा था। उन्होंने कठोर तपस्या और अटूट विश्वास के साथ हर क्षण शिव को पुकारा। ऋतुएँ बदलती रहीं, समय बीतता रहा, पर उनका संकल्प कभी नहीं डगमगाया।

कैलाश पर समाधि में लीन शिव के भीतर भी एक सूक्ष्म स्पंदन था, जो पार्वती की भक्ति को महसूस कर रहा था। जब दोनों की दृष्टि मिली, तो वह मिलन केवल प्रेम नहीं, बल्कि आत्मा के पूर्ण समर्पण का प्रतीक बन गया जहाँ ‘मैं’ समाप्त होकर ‘हम’ का जन्म होता है।शिव और पार्वती का यह संग सृष्टि का आधार है, जो प्रेम, विश्वास और ऊर्जा का अनंत प्रकाश फैलाता है।

Read More
महिदपुर रोड पर घना कोहरा और हल्की फुहारें

महिदपुर रोड पर घना कोहरा और हल्की फुहारें

महिदपुर रोड पर सर्दियों का पहला असली झटका महसूस हुआ. घना कोहरा और हल्की फुहारों ने शहर को जादुई रूप दिया. मौसम विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने सावधानी बरतने की चेतावनी दी.

Read More

महिदपुर रोड में बहेगी संगीतमयी श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा

26 दिसंबर से 1 जनवरी तक चलेगा सात दिवसीय धार्मिक आयोजन सुरेश परिहार, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे महिदपुर रोड- प्रस्तावित श्रीराम हनुमान मंदिर, महिदपुर रोड पर आगामी 26 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 तक भव्य एवं संगीत मयी श्रीमद्? भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है. कथा प्रवचन का दायित्व सुप्रसिद्ध कथा प्रवक्ता…

Read More

गर्मियों में प्यासे परिंदों के लिए एक संजीवनी प्रयास

जैसे-जैसे तापमान बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे न केवल इंसान, बल्कि बेजुबान पक्षी भी पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं. ऐसे समय में कुछ समाज सेवकों द्वारा किया गया यह छोटा सा लेकिन अत्यंत संवेदनशील कार्य न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि मानवता की एक सुंदर मिसाल भी है.

Read More

टूटते ख्वाबों की ग़ज़ल

गहन भावनाओं और रात के सन्नाटे के माध्यम से जीवन की नाजुकताओं और बेचैनियों को बयान करती है। लेखक की नींद में खलल डालने वाली घटनाओं के माध्यम से यह व्यक्त किया गया है कि किस तरह अचानक आने वाली परिस्थितियाँ हमारी मानसिक शांति और हौसलों पर असर डालती हैं। रात भर दिल और चाँद दोनों रोते हैं, जो मानवीय संवेदनाओं का मिश्रण प्रस्तुत करता है। “इत्र सी सुगंध” और “तितलियों के पंखों पर रंग” जैसी छवियाँ जीवन की सुंदरता और नाजुकता को दर्शाती हैं, 

Read More
मायके के दरवाज़े पर खड़ी एक भावुक बेटी, माँ की तस्वीर को देखते हुए बीते दिनों को याद करती हुई।

पराया मायका

माँ के रहते मायका सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि प्यार, अपनापन और प्रतीक्षा का दूसरा नाम होता है। लेकिन माँ के जाने के बाद वही घर क्यों पराया-सा लगने लगता है? ‘पराया मायका’ एक ऐसी भावुक लघुकथा है, जो हर बेटी के दिल में छिपे उस खालीपन को शब्द देती है, जिसे केवल माँ की अनुपस्थिति ही पैदा कर सकती है।

Read More

रास आई न तन्हा है ये ज़िंदगी

ज़िंदगी तन्हा लगती है जब तक कोई साथी नहीं होता। चाहे कितनी भी भक्ति कर लो या चारों ओर दुनिया की दौड़-धूप हो, दिल को सुकून केवल किसी प्रिय के साथ से मिलता है। तन्हाई चारों ओर हो तो हर खुशी अधूरी लगती है, और सिर्फ एक साथी के होने से ही जीवन में हल्की मुस्कान और राहत महसूस होती है। जीवन की सच्ची सुंदरता तब उजागर होती है जब कोई पास हो, बातों में मुस्कान बिखेरता हो और हर ग़म को कम कर देता हो। यही सरल, पर अनमोल एहसास है — एक साथी का होना ही जीवन को पूरा बनाता है।

Read More

देह की देहरी से परे

ह की देहरी लांघकर तुम कभी मुझ तक नहीं आ पाओगे। मैं केवल बाहर से दिखाई देने वाला शरीर नहीं हूँ, मैं सिर से पाँव तक, बाहर से भीतर तक सम्पूर्ण हृदयवत हूँ। इस शरीर के खोल की दीवारें मैंने कछुए जैसी मजबूत बनाई हैं। यह बदन भोग्य नहीं, यह एक मंदिर है, जिसमें मैंने स्वयं की प्रतिमा स्थापित की है और उस द्वार की प्रहरी मैं स्वयं हूँ।

Read More

अरावली केस : सुप्रीम कोर्ट की अपने ही आदेश पर रोक

अरावली पर्वतमाला से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को जारी अपने ही आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को होगी और तब तक किसी भी तरह की खनन गतिविधि नहीं की जाएगी। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार और अरावली क्षेत्र से जुड़े चार राज्यों राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और दिल्लीसे इस मामले में जवाब तलब किया है।

Read More