gulmohar

“किताब”

किताबें सचमुच खुशनसीब होती हैं। हर कोई उन्हें खोलकर पढ़ना चाहता है, उनकी गहराइयों तक उतर जाना चाहता है। मगर हम… हम तो अपनी ज़िंदगी यूँ ही किताबों से बातें करते हुए गुज़ार देते हैं। पता नहीं, हमारी अपनी गहराइयों को समझने वाला कौन होगा…और कब आएगा…जो हमें भी किसी किताब की तरह ध्यान से पढ़ सके, और हमारी ख़ामोश निगाहों में छिपे अर्थों को समझ पाए।

Read More

श्मशान से लौटती साँसें…

श्मशान की राख से लौटकर जब ज़िंदगी की जिम्मेदारियाँ बाँहों में भर ली जाती हैं—तब यह कविता मृत्यु से आँख मिलाकर जीवन को चुनने का साहस बन जाती है।

Read More

“इश्क़, एल्कोहल और ऑक्सीटोसिन

नब्बे का दशक इश्क़, संगीत और साइंस की जुगलबंदी का दौर था — जब रिकी मार्टिन दिलों पर राज कर रहे थे और वैज्ञानिक प्यार का फार्मूला गढ़ रहे थे। यह लेख उस मोहब्बती समय की एक संवेदनशील, हास्य-विनोद और आत्ममंथन से भरी झलक है।

Read More

छोटी मदद, बड़ा असर

मॉल में आम दिन जैसा लग रहा था, लेकिन 4 साल की आन्या ने दिखा दिया कि छोटी-सी मदद भी बड़ा असर डाल सकती है। अपने बलून और कपकेक्स का पैकेट लिए वह मुस्कुराते हुए उस बच्ची को दे देती है, जिसे कोई नहीं देख रहा था। माता-पिता की नजरों के सामने यह नन्हीं सी मानवता का सबक, उनके दिलों को छू जाता है और समाज में मदद और दयालुता का संदेश फैलाता है।

Read More

हिन्दी से है पहचान

सुमन दीक्षित, प्रसिद्ध लेखिका, कोलकाता अभिव्यक्ति किसी भी जीव की,ख़ासकर मानवीय संवेदनाओं का,सशक्त माध्यम परिलक्षित होती है—वह हो चाहे किसी भी रूप में…! अगर भाषा की बात आती,तो सम्मान हर भाषा का है;पर हिन्दी तो मेरे लिए जैसेईश्वर का एक वरदान है…! हिन्दी से है पहचान, क्षमता,गौरव भरा होता सदा सृजन।हिन्दी से जुड़ी है आत्मा…

Read More

ग़ज़ल

यह बात ज़ात-पात की नहीं, सोच और नज़रिया की है।हर बात की तह में जाने की आदत कभी फ़ायदा देती है, कभी सुकरात की तरह जान भी ले लेती है।
चींटी की कहानी सिखाती है कि औक़ात जानकर, शांत रहकर आगे बढ़ना ही बुद्धिमानी है। बच्चों को भी यही समझ देना चाहिए कि हर अनजानी बात पर भरोसा न करें।

Read More
विरह में प्रियतम की प्रतीक्षा करती नायिका का भावपूर्ण चित्र

बिरहा की भोर 

प्रेम और विरह की गहन अनुभूति से सजी यह कविता चातक, स्वाति और मधुसूदन जैसे प्रतीकों के माध्यम से प्रतीक्षा, तड़प और आशा का अद्भुत चित्र प्रस्तुत करती है। हर पंक्ति पाठक को भावनाओं की गहराई तक ले जाती है।

Read More

यह घर बहुत हसीन है

मेरी ज़िंदगी एक जगह से शुरू नहीं हुई।
वह एक किराए के मकान से दूसरे तक भटकती रही। यह घर सिर्फ़ ईंट और सीमेंट से नहीं बना, इसमें हमारे डर, संघर्ष और सपने बसे हैं। इसीलिए यह साधारण-सा घर मेरे लिए बहुत हसीन है।

Read More
छात्र आंदोलन में पोस्टर और तख्तियां लिए प्रदर्शन करते युवा विद्यार्थी, जिनमें जेनजी का आक्रोश और बदलाव की मांग स्पष्ट दिखाई दे रही है।

जेनजी बोल रही है, क्या हम सुन रहे हैं ?

नई दिल्ली से लेकर पुणे तक छात्र आंदोलनों में दिखाई दे रही जेनजी की भाषा कई सवाल खड़े करती है। क्या गालियों वाले पोस्टर केवल असभ्यता हैं या वर्षों से जमा आक्रोश की अभिव्यक्ति? यह लेख जेनजी के स्वभाव, सोशल मीडिया, वेब सीरीज़ और बदलती विरोध संस्कृति का संतुलित विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

Read More