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दादी की बिंदी…

गांव के फेरीवाले से सुर्ख लाल बिंदी खोजता दादा, दरअसल अपने प्रेम और सम्मान को जीवित रखना चाहता है। बहू की कठोरता के बीच दादी का स्वाभिमान और दादा का निश्छल प्रेम सामने आता है, जब वह स्वयं दादी के माथे पर बिंदी लगाता है—जैसे वर्षों बाद पूर्णिमा का चाँद खिल उठा हो।

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राघव और रिद्धिमा की प्रेम कहानी भरोसे की डोर का भावनात्मक दृश्य

भरोसे की डोर

क्या प्रेम में किसी को खो देने का डर जरूरी है? राघव और रिद्धिमा की कहानी बताती है कि रिश्ते केवल वादों से नहीं, बल्कि ईमानदारी, संवाद, सम्मान और भरोसे से मजबूत बनते हैं।

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कभी-कभी गलतफ़हमी

कभी-कभी हमें भ्रम हो जाता है कि सामने वाला सच में प्यार करता है उसकी बातों में अपनापन दिखता है, इकरार के लम्हे भी सच्चे लगते हैं। वह गले लगकर समझने का दावा तो करता है, पर दुनिया के सामने वही समझ कमज़ोर पड़ जाती है और हमारी नासमझी गिनाई जाती है। मन जैसा चाहे वैसा प्यार दे भी दे, और इल्ज़ामों की बरसात भी उसी मन से कर दे तब रिश्ते बोझ बनते देर नहीं लगती।

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मतदाता जागरुकता के लिए कांग्रेस ने निकाली प्रभात फेरी

महिदपुर विधानसभा क्षेत्र के महिदपुर रोड में गुरुवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा मतदाता जागरूकता अभियान के अंतर्गत प्रभात फेरी निकाली गई. इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने लोगों से अपने नाम मतदाता सूची में जुड़वाने और मतदान के प्रति सजग रहने का आह्वान किया. कार्यक्रम का नेतृत्व विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेश परमार और महिदपुर विधानसभा के विधायक दिनेशचंद्र बोस ने किया.

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पूजा सामग्री की दुकान में आपस में चर्चा करती दो कौड़ियाँ और पास में हँसता हुआ कॉकरोच, जो सामाजिक और मीडिया व्यंग्य का प्रतीक है।

उलझन

जब कौड़ियाँ चर्चा का विषय बन जाएँ, पत्रकार और शिक्षक आमने-सामने खड़े हो जाएँ और कॉकरोच हँसने लगें, तब जन्म लेता है एक ऐसा व्यंग्य जो समाज की विडंबनाओं को आईना दिखाता है।

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भक्ति, प्रेम और वैराग्य की दिव्य गंगा है श्रीमद् भागवत कथा

श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर भक्ति, प्रेम और वैराग्य का अनुपम संगम देखने को मिला। पूज्य श्री सुनीलकृष्ण जी व्यास ने गोपी गीत और राजा परीक्षित जन्म प्रसंग के माध्यम से निष्काम भक्ति और भगवान की करुणा का भावपूर्ण संदेश दिया। संपूर्ण वातावरण हरि नाम और भक्तिरस से सराबोर रहा।

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गाँव के पुराने घर में दादू और पोते के भावुक मिलन का दृश्य

ख़ामोश घर की दीवारें फुसफुसाती हैं

दादू की आँखों में वर्षों से पल रहे इंतज़ार को जब पोता समझता है, तो रिश्तों, मिट्टी और अपनी जड़ों से जुड़ने की एक भावुक कहानी सामने आती है.

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सांवला रंग

“सांवला रंग” एक प्रेरक लघुकथा है जो समाज में व्याप्त रंगभेद की मानसिकता पर गहरा प्रहार करती है। कहानी में एक माँ अपने जीवन में झेले गए तिरस्कार को याद करते हुए संकल्प लेती है कि उसकी बेटी की पहचान उसके रंग से नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा और उपलब्धियों से होगी। वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम तब सामने आता है जब उसकी बेटी आई.पी.एस. अधिकारी बनकर पूरे शहर का गौरव बन जाती है।

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उड़ चलें फिर से मासूम पंखों पर

बचपन वह उम्र है, जब दुनिया का कोई ग़म साथ नहीं चलता। मासूमियत इतनी गहरी होती है कि हर डाँट भी प्यार लगती है और हर शरारत में एक बेफ़िक्री छुपी रहती है। बच्चे न गीत के सुर जानते हैं, न जिंदगी की डर-फिक्र फिर भी सबसे मधुर धुन वही गा लेते हैं। किसी पत्थर को उछालते हुए भी हँस देना, किसी अजनबी से भी अपना-सा रिश्ता बना लेना, यही उनकी अलमस्त दुनिया का जादू है।

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संगीत सूर्य केशवराव भोसले का 105वाँ स्मृति दिवस मनाया गया

मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक परिषद द्वारा संगीत सूर्य केशवराव भोसले के 105वें स्मृति दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि, लघु कथाकार और समीक्षक श्री संतोष सूपेकरजी ने छात्राओं को भोसले जी की अविस्मरणीय नाट्य परंपरा से परिचित कराते हुए युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। भोसले जी मराठी संगीत नाटक के सुप्रतिष्ठित कलाकार थे, जिन्होंने कम उम्र में नाट्य जगत में प्रवेश किया, नारी पात्रों की भूमिका निभाई और अनेक महत्वपूर्ण प्रयोगों से मराठी रंगभूमि के संगीत नाटक के सुवर्णकाल को पुनर्जीवित किया। उनके योगदान ने नाट्य, संगीत और सिनेमा में अमूल्य छाप छोड़ी। छात्राओं द्वारा प्रस्तुत रंगारंग कार्यक्रम और संस्था की प्रमुखों के उद्बोधन ने इस स्मृति दिवस को यादगार बनाया।

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