यशोदा-दामोदर
यह भक्ति कविता यशोदा मैया द्वारा ओखल से बंधे दामोदर स्वरूप श्रीकृष्ण की लीला, वात्सल्य और हरि-भक्ति की महिमा को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है। कविता में प्रेम, करुणा और समर्पण का दिव्य स्पर्श है।

यह भक्ति कविता यशोदा मैया द्वारा ओखल से बंधे दामोदर स्वरूप श्रीकृष्ण की लीला, वात्सल्य और हरि-भक्ति की महिमा को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है। कविता में प्रेम, करुणा और समर्पण का दिव्य स्पर्श है।
पुणे–मुंबई एक्सप्रेसवे पर बन रहा 13 किलोमीटर लंबा ‘मिसिंग लिंक’ केवल ट्रैफिक कम करने की परियोजना नहीं है, बल्कि इसके खुलने से पश्चिम महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था और जीवनशैली पर दूरगामी असर पड़ने की उम्मीद है। प्रस्ताव है कि यह मार्ग 1 मई, महाराष्ट्र दिवस से आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
टूटते तारे से मांगी गई एक मन्नत और उसके बाद आई खबर यह कहानी इश्क, इंतजार और किस्मत की कड़वी सच्चाई को बयां करती है।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने स्पष्ट कर दिया है कि सराफा चौपाटी वाली जो 80 दुकानें दशकों से लग रही हैं वही दुकानें एक सितंबर के बाद भी वहीं लगेंगी। हां जो बाकी जितनी भी दुकानें अभी लग रही हैं, उन्हें नहीं लगने देंगे।इन 80 दुकानों को लेकर यदि सराफा व्यापारियों की कोई आपत्ति है तो उसका हल भी निकालेंगे। यह बात सराफा एसोसिएशन पदाधिकारियों को आज हुई बैठक में समझा दी है। सराफा की तरह यह चौपाटी भी धरोहर है। इंदौर का कोई नागरिक नहीं चाहेगा कि चौपाटी यहां से हटाई जाए। नगर निगम ने तो 80 दुकानों को अनुमति वाली रिपोर्ट महीनों पहले जारी कर दी थी, फिर ये विरोध की बातें अब अचानक क्यों शुरु कर दी।
यह लघुकथा ज्ञान और आचरण के अंतर को उजागर करती है। जो ऋषि संसार को करुणा का उपदेश देता है, वही अपने घर में उसे जी नहीं पाता। अंततः शब्दों की खोखली चमक टूटती है और सच्चे आत्मबोध का जन्म होता है पर एक अपूरणीय क्षति के साथ।
मां का प्रेम निस्वार्थ और अटूट होता है। एक छोटी सी चिड़िया, जो तेज बारिश और तूफान में भी अपने अंडों की रक्षा के लिए अडिग खड़ी रही, हमें ममता का सच्चा अर्थ समझाती है। यह भावनात्मक अनुभव हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या इंसानों में भी ऐसा ही निष्काम प्रेम मौजूद है।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित कथा-कथन कार्यक्रम में साहित्य, संवेदना और सामाजिक सरोकारों की प्रभावशाली प्रस्तुति देखने को मिली।
एक समय था जब हर यात्रा का सबसे भरोसेमंद साथी “बिस्तरबंद” होता था। उसमें सिर्फ बिस्तर नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सहूलियत, बचपन की जिज्ञासाएँ और सफ़र की गर्माहट बंद होती थी। आज भले ही एयरबैग ने उसकी जगह ले ली हो, पर यादों में बिस्तरबंद अब भी ज़िंदा है।
नागदा में आयोजित धर्मसभा में मुनिराज श्री डॉ. संयमरत्न विजय जी म.सा. ने कहा कि मनुष्य जन्म चिंतामणि रत्न के समान दुर्लभ है। उन्होंने जिनेंद्र भक्ति, वैरभाव त्याग और आत्मा को निर्मल बनाने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए धर्म को जीवन का वास्तविक मार्ग बताया।