ज़िंदगी आखिर कट ही जाएगी

ज़िंदगी अंत में कट ही जाती है चाहे हम मोहब्बत में डूबे हों या किसी की नफ़रत से लड़ रहे हों। कभी दर्द के साये में गुज़रती है, तो कभी हँसी की छोटी-सी किरण उसे रोशन कर देती है।
जीवन की यही सच्चाई है: दो पल का सफ़र, जो हाथ से फिसलते हुए भी हमें कुछ सिखा जाता है। खुशियाँ छोटी हों या बड़ी, बाँट देने से ही दिल हल्का होता है। ग़मों को अंदर दबाकर रखने से वे बोझ बन जाते हैं लेकिन किसी अपने के साथ उन्हें साझा कर लिया जाए तो वही दर्द ताकत में बदल जाता है।

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किस्मत का खेल

अपने माता-पिता को आग में खोने के बाद अरुण बिल्कुल अकेला रह गया। एक साड़ी की दुकान में काम करते हुए उसने चोरी रोककर अपने मालिक का विश्वास जीत लिया। मालिक ने उसकी ईमानदारी देखकर उसे अपनी बेटी निशा के साथ विवाह के लिए कहा। किस्मत से उजड़ा अरुण का घर फिर से बस गया, और तीनों एक खुशहाल परिवार बन गए।

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पहचान लिखो…

एक उम्र-दराज़ औरत अपने वजूद की दास्तान खुद नहीं. उस नज़र से लिखवाना चाहती है जो उसे सच में समझती है। दुनिया ने उसे अपने पैमानों से तौला, पर वह बस इतना चाहती है कि कोई उसे “इंसान” की तरह लिखे।

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नैनो बनाना ट्रेंड: सोशल मीडिया पर 3D फिगर बनाने की नई लहर

सुरेश परिहार, लाइव वायर न्यूज, पुणे सोशल मीडिया पर एक नया क्रेज़ छा गया है, जिसे लोग नैनो बनाना के नाम से जानते हैं. इस ट्रेंड में तस्वीरों को कुछ ही सेकंड में 3D डिजिटल फिगर में बदल दिया जाता है. गूगल के नवीनतम टूल, 2.5, की मदद से लोग अपनी, अपने दोस्तों, पालतू जानवरों…

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“सृजनिका” के छठे अंक का गरिमामयी लोकार्पण

मुंबई से प्रकाशित त्रैमासिक हिंदी साहित्यिक पत्रिका सृजनिकाके छठे अंक का लोकार्पण मंगलवार, 26 अगस्त को कुर्ला स्थित यूकेएस इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ एंड रिसर्च के सभागार में हुआ.
समारोह के मुख्य अतिथि हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के कार्यकारी निदेशक (नॉन-फ्यूल बिज़नेस) मुरलीकृष्ण वेंकट वाद्रेवु ने हिंदी को व्यवसाय-वृद्धि की महत्वपूर्ण सहयोगी भाषा बताते हुए अपने अनुभव साझा किए.

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गोगापुर गौशाला में गायों को चारा खिलाते समाजजन, बरडिया परिवार द्वारा जीव दया और गौ सेवा का दृश्य

बरडिया परिवार द्वारा जीव दया और गौ सेवा

महिदपुर रोड के गोगापुर गौशाला में बरडिया परिवार द्वारा जीव दया और गौ सेवा का प्रेरणादायक आयोजन किया गया। इस अवसर पर जैन समाज की गरिमामयी उपस्थिति में सेवा, श्रद्धा और धर्म का अद्भुत संगम देखने को मिला।

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वास्तु टिप्स: लिविंग रूम में ये तस्वीरें लगाने से बढ़ती है सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली

झरने या बहते जल की तस्वीर घर में लाती है पॉजीटिविटी

घर की सजावट केवल सुंदरता तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह हमारे मन, भावनाओं और ऊर्जा पर भी गहरा प्रभाव डालती है। खासकर लिविंग रूम, जहां परिवार के सदस्य सबसे अधिक समय बिताते हैं और मेहमानों का स्वागत होता है, उसे घर का ऊर्जा केंद्र माना जाता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार यदि इस स्थान पर सही चित्रों और पेंटिंग्स का चयन किया जाए, तो यह न केवल वातावरण को आकर्षक बनाता है, बल्कि घर में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है।

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चर्चे थे मुख्तियार भाई की बेलबॉटम की मोरी के

जब राजेश खन्ना का जादू ढल रहा था और अमिताभ बच्चन का दौर उभर रहा था, तब कस्बाई जवानी भी बड़े परदे की नकल में अपने सपने सिलवा रही थी। महिदपुर रोड पर फैशन का मतलब था मुख्यत्यार भाई की बेलबॉटम की मोरी, जमीन से रगड़ खाती पैंट और उसे बचाने के लिए लोहे की चेन का अनोखा जुगाड़। यह सिर्फ पहनावा नहीं था, बल्कि उस समय की जवानी का स्वाभिमान, जिद और रचनात्मकता थी, जिसने छोटे शहर को भी अपने तरीके से ‘स्टाइलिश’ बना दिया।

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घर के कोने में अकेली बैठी एक भारतीय महिला, शांत लेकिन उदास चेहरा, पास में सजा हुआ घर और दीवार पर टंगी परिवार की तस्वीरें

मुझे अच्छा नहीं लगता…

“मुझे अच्छा नहीं लगता” एक संवेदनशील हिंदी कविता है, जो एक गृहिणी के अनदेखे श्रम, भावनात्मक अकेलेपन और उपेक्षा के दर्द को उजागर करती है। यह रचना उन स्त्रियों की आवाज़ है, जो परिवार के लिए सब कुछ समर्पित कर देती हैं, लेकिन बदले में मान-सम्मान की कमी महसूस करती हैं।

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पितृपक्ष

पितृपक्ष का यह सोलह दिवसों का पर्व पूर्वजों की स्मृति और श्रद्धा का विशेष समय है। श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान से पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। वेद, उपनिषद और गीता में भी यही बताया गया है कि आत्मा अजर-अमर है और श्राद्ध से हमें पुण्य मिलता है। कौए और गौ सेवा का विधान पितृपक्ष को और भी पावन बना देता है।

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