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शाकुन्तलम सम्मान 2026 के लिए चयनित जयपुर की लेखिका संतोषी

ईशमधु तलवार स्मृति शाकुन्तलम सम्मान 2026 जयपुर की लेखिका संतोषी को

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र संस्थान की ओर से स्थापित ईशमधु तलवार स्मृति शाकुन्तलम सम्मान 2026 के लिए लेखिका संतोषी का चयन किया गया है। उन्हें उनकी पुस्तक ‘रोही की रोजड़ी’ के लिए 21,000 रुपये की सम्मान राशि, शॉल, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किया जाएगा। सम्मान समारोह 11 अक्टूबर को जयपुर में आयोजित होगा।

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: मेरी अर्थी कविता में मृत्यु के बाद दिखावे की संवेदनाओं और मातम का प्रतीकात्मक दृश्य

मेरी अर्थी

क्या किसी के जाने के बाद आँसू बहाना और उसकी तारीफों के पुल बाँधना ही सच्ची संवेदना है? ‘मेरी अर्थी’ कविता मौत के बाद होने वाले दिखावे, झूठे मातम और सोशल मीडिया पर संवेदनाएँ बटोरने की मानसिकता पर तीखा व्यंग्य करती है। यह कविता रिश्तों की सच्चाई और इंसान के दोहरे व्यवहार को बेबाक शब्दों में सामने रखती है।

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जीवनधारा कहानी में समाजसेविका युवती और उससे भावनात्मक रूप से जुड़ी महिला

जीवनधारा: बदनाम गली में इंसानियत की तलाश

क्या किसी महिला का अतीत उसके वर्तमान और उसके मानवीय कार्यों को तय करता है? ‘जीवनधारा’ एक ऐसी युवती की मार्मिक कहानी है, जो खुद शोषण की शिकार होने के बाद समाज की ठुकराई महिलाओं को सम्मान और नई जिंदगी दिलाने के लिए संघर्ष करती है। यह कहानी समाज के दोहरे चरित्र, महिला अस्मिता और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर सवाल उठाती है।

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नदी के किनारे बैठी श्वेता, जो विरह की पीड़ा से निकलकर नई शुरुआत के बारे में सोच रही है।

‘रिहाई’

क्या किसी प्रियजन की स्मृतियों के साथ जीते हुए भी जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है? ‘रिहाई’ की श्वेता को नदी के सहज प्रवाह से इस सवाल का उत्तर मिलता है। यह कहानी विरह, स्मृतियों, आत्ममुक्ति और नई शुरुआत की प्रेरक यात्रा है।

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वर्तमान की गुफ्तगू हिंदी कविता में चुप्पी, विरोध और बेहतर भविष्य की तलाश का प्रतीकात्मक दृश्य

वर्तमान की गुफ्तगू

जब हालात असहनीय होने लगते हैं, तब बोलना और सवाल करना जरूरी हो जाता है। ‘वर्तमान की गुफ्तगू’ चुप्पी, विरोध और संवाद के बीच बेहतर भविष्य की तलाश करती एक संवेदनशील हिंदी कविता है।

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₹125 की सेकंडहैंड साइकिल से पत्रकारिता की राह पर निकला मुन्ना

मुन्ना से कीर्ति राणा

यह कहानी एक ऐसे जांबाज पत्रकार की है, जिसने अपनी पत्रकारिता में कामरेडी अंदाज कभी नही छोड़ा.. वह इंदौर का कल का मुन्ना..आज शहर नहीं देश का एक अच्छे पत्रकारों में शुमार है यह कहानी उसी की जुबानी है. मुन्ना कैसे पत्रकार कीर्ति राणा बना. घटना, देशकाल वातावरण सभी उन्हीं की पुस्तक किस्से कलमगिरी से लिए गए हैं. (कीर्ति राणा की किताब किस्से कलमगिरी के की यह सीरीज 4के पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी. ऐसा मेरा विश्वास है)

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स्टेशन पर वर्षों के इंतजार के बाद पहली बार मिले राघव और रिद्धिमा

प्यार का इंतज़ार

राघव और रिद्धिमा के बीच दूर रहकर शुरू हुआ रिश्ता धीरे-धीरे प्यार में बदल गया. वर्षों के इंतजार के बाद जब दोनों पहली बार आमने-सामने आए, तो उनके पास कहने के लिए बहुत कुछ था और शब्द बहुत कम.

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आस्था और विवेक के बीच उलझे व्यक्ति को दर्शाती यथार्थवादी तस्वीर

आस्था रखिए, लेकिन विवेक मत खोइए

किसी घटना के बाद सवाल उठाना जरूरी है, लेकिन सोशल मीडिया के अप्रमाणित आरोपों के आधार पर किसी को दोषी ठहराना कितना उचित है? आस्था, गुरु और भीड़ की मानसिकता के बीच विवेक की जरूरत पर विचार.

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अकेले बैठे भावुक पुरुष के चेहरे पर छिपे दर्द को दर्शाती यथार्थवादी तस्वीर

पुरुष ! तुम्हें रोना नहीं

पुरुष भी रोता है, लेकिन समाज उसे रोने की अनुमति नहीं देता. माँ की छाया से लेकर जीवन के संघर्षों तक, वह अपनी पीड़ा को भीतर छिपाकर जीता रहता है.

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