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सबसे बड़ा है कौन

सत्ता ,संगठन और राजनेता राजनीति की मुख्य धुरी हैं। कहा जाता है कि अगर इनमें तालमेल है तो सब कुछ ठीक नजर आता है मगर कभी कभी इनमें वर्चस्व की लड़ाई छिड़ जाती है और फिर यह तयः करना मुश्किल होता है कि इन तीनों में से कौन बड़ा है ,सर्वश्रेष्ठ है या किसकी चलती है या किसकी सुनी जा रही है। देखा जाए तो संगठन ही सबसे बड़ा होता है क्योंकि संगठन ही सबको जोड़कर रखता है और संगठन के नीचे ही सब काम करते हैं और संगठन ही निर्णय करता है कि कौन चुनाव लड़ेगा और जीतकर सत्ता में जायेगा और कौन संगठन में काम करेगा। संगठन ही तयः करता है कि कौन राजा बनेगा और कौन मंत्री । इसलिए संगठन और संगठन का मुखिया ही बड़ा होता है। संगठन से अलग होकर चुनाव लड़ने वाले चारों खाने चित ही दिखाई दिए हैं।

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saint

संतोष बड़ा धन

तिरुवल्लुवर तमिलनाडु के एक महान संत, कवि और दार्शनिक थे. दूर-दूर से लोग उनसे मार्गदर्शन लेने आते. एक बार एक व्यक्ति ने उनसे पूछा, गुरुजी, इतने विद्वान होने के बावजूद आप दयनीय हालत में गुजारा करते हैं. आपकी बातों से हमें क्या मिलेगा?तिरुवल्लुवर मुस्कुराए और उस व्यक्ति से पूछा क्या तुम मेरे साथ एक यात्रा…

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शिव से हो जाओ तुम..

जो खोना नही चाहते रिश्तों को जहर के घूंट पी के भी, मुस्कुराओ तुम, शिव से हो जाओ तुम.. दो बोल भी मीठे ना मिले किसी रिश्ते में, कोई गम नही, तपती झुलसती बातें भुला के प्यार की बरसात कर जाओ तुम शिव से हो जाओ तुम…. बड़े भी चाहे तुम्हें, बच्चे भी बतियाये, तुमसे…

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रातभर टुकुर-टुकुर ता‍कते रहते हैं छत, फ‍िर भी नहीं आती नींद; तो ट्राई करें 4-7-8 ब्रीदिंग टेक्‍न‍िक

। आज कल लोगों की लाइफस्टाइल काफी बि‍गड़ गई है। इस कारण लोग कई सारी बीमारियाें का श‍िकार होते जा रहे हैं। मोटापा, डायब‍िटीज, द‍िल की बीमारी तो आम है। इसका असर हमारे मेंटल हेल्‍थ पर भी देखने को म‍िलता है। इस कारण लोगों में नींद न आने की समस्‍या भी देखने को म‍िलती है। ऐसे…

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महेश शुक्ला: दोस्ती, डांट और प्यार का अनोखा सफर

पुणे की मंडली आज भी कर रही इंतजार अकोला में बैठे हैं अपने ‘डॉन’ महेश शुक्ला

आप मुझे ढूंढ रहे हो और मैं आपका यहां इंतजार कर रहा हूं..ये दोनों डायलॉग अमिताभ बच्चन की फिल्मों में एक में उनका इंतजार हो रहा है दूसरे में वो किसी का इंतजार कर रहे हैं. एकदम कंट्रास्ट. एक दम उलट. वैसे ही हमारे अग्रज, हमारे सहयोगी, हमारे आशीर्वाद दाता महेश शुक्ला भी एकदम कंट्रास्ट है. वे जैसे हैं वैसे दिखते नहीं… जैसे दिखते हैं वैसे हैं नहीं. 60 की उम्र के बाद भी (असली उम्र नहीं बताउंगा) यदि किसी ने उनके प्रति इस बात के लिए सहानुभूति जताई कि वे बुजुर्ग हैं तो भले ही आपको मुंह पर कुछ नहीं कहे लेकिन मन में जरुर कहेंगे बुड्ढा होगा तेरा बाप… क्योंकि इस उम्र में भीशख्सियत हेलमेट लगाकर जब केटीएम जैसी स्पोर्टस बाइक चलाते हैं तो अच्छे-अच्छे युवाओं को पीछे छोड़ देते हैं.

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अजीर्जुरहमान भाईजान दोस्ती की कहानी

अजीर्जुरहमान : गिफ्ट ऑफ गॉड

अजीर्जुरहमान उर्फ भाईजान के साथ 25 साल पुरानी दोस्ती की यह कहानी सिर्फ यादों का सिलसिला नहीं, बल्कि सच्चे रिश्ते, बेबाक स्वभाव और जीवन के संघर्षों की झलक है। पत्रकारिता, गांव की राजनीति और जिंदगी के उतार-चढ़ाव के बीच भी यह दोस्ती हमेशा मजबूत बनी रही। ❤️

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गर्मियों में प्यासे परिंदों के लिए एक संजीवनी प्रयास

जैसे-जैसे तापमान बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे न केवल इंसान, बल्कि बेजुबान पक्षी भी पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं. ऐसे समय में कुछ समाज सेवकों द्वारा किया गया यह छोटा सा लेकिन अत्यंत संवेदनशील कार्य न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि मानवता की एक सुंदर मिसाल भी है.

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भरपेट खाना

हेमा के तीन बच्चे थें।सबसे बडी़ लड़की माया फिर दो लड़के किट्टू और बिट्टू ।हेमा लोगों के घरों में बर्तन मांजने और झाडू पोछे का काम करती थीं ।कहने को पति था , लेकिन न होने के बराबर ।वह एक दूकान पर कपड़े सिलाई का काम करता था। हुनर था हाथों में ।सिलाई अच्छी कर…

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“कभी खुद के लिए भी जी ले माँ…”

जाने हमेशा ऐसा क्यों लगता है सारे असंभव काम आप ही कर सकती हो… जादुई सी बेतरतीब से बंधे माँ के जूडे से हमेशा बाल की एक पतली सी लट छूट जाया करती थी, जो पसीने से गर्दन में चिपकी रहती। इतनी गर्मी में रोटियां बनाते हुए माँ पसीने से नहा उठती। सब काम निपटा…

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प्रेम होने तो दो

प्रेम की कथा इतनी सरल नहीं कि शब्दों में बाँधी जा सके। “धरती सब मसि कियो, लेखनी सब बनराई”—यह यूँ ही नहीं लिखा गया। जब प्रेम को लिखना चाहा, तो लेखनी ने हार मान ली। उसमें धूल, राख और व्यापार की कठोरता निकल पड़ी। क्योंकि प्रेम में कोई सौदा नहीं होता, कोई मोल नहीं होता।

कभी प्रेम में एक महामौन था, जिसमें न मिलने का डर था, न खोने का भय। स्त्री अपने घर की नींव संभालने आई, पुरुष घर को भरने कमाने निकला। पर प्रेम की अनुगूँज बहती रही—नदियों में, झरनों में, लहरों में, हवाओं में… बिना कहे, बिना सुने।

जो प्रेम को अभिशाप कहकर कोसता है, वह भी जानता है कि प्रेम होना ही सबसे बड़ा वरदान है। लेकिन प्रेम करने से पहले, उसे समझना, महसूस करना, जीना आना चाहिए।

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