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एक प्रश्न

शर्मा जी ने जीवन की पूरी कमाई दो बेटों में बाँट दी, पर बदले में एक कमरा तक न मिला। किराए के मकान में रहने वाले शर्मा जी सुबह का खाना बड़े बेटे और शाम का खाना छोटे बेटे के यहाँ खाकर लौट आते। यह दिनचर्या उनके दस वर्षीय पोते निखिल से छिपी नहीं थी। एक दिन वह मासूमियत से पूछ बैठा. “पापा, जब आप बूढ़े हो जाएँगे… तो दूसरे वक्त का खाना कहाँ खाएँगे

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अशुद्ध जल सप्लाई : एसडीएम ने मामला किया खारिज

नगर पालिका परिषद नागदा द्वारा शहर को लगातार आठ दिनों तक मटमैला, मिट्टीयुक्त और अशुद्ध जल सप्लाई किए जाने की स्वयं की लिखित स्वीकारोक्ति सामने आने के बाद भी एसडीएम द्वारा प्रकरण को आंशिक आपत्ति स्वीकार कर खारिज कर देना पूरे शहर में गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. आवेदक अभय चोपड़ा ने इस निर्णय को सत्ताधारी दल के दबाव में लिया गया बताते हुए कहा कि यह सीधे-सीधे जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 151 से 164 के अंतर्गत दंडनीय अपराध बनता है.

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महिला काव्य मंच की मासिक काव्य गोष्ठी सम्पन्न

महिला काव्य मंच (मध्य) की लखनऊ इकाई द्वारा 14 नवम्बर 2025 को ऑनलाइन मासिक काव्य गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया. कार्यक्रम बाल दिवस के उपलक्ष्य में समर्पित रहा, जिसमें बचपन, मासूमियत, संस्कार, स्मृतियों और जीवन मूल्यों पर आधारित अनेक भावपूर्ण व विविध विधाओं की रचनाएँ प्रस्तुत की गईं. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. ऊषा चौधरी, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश मध्य (मकाम) तथा विशिष्ट अतिथि नोरिन शर्मा, सचिव पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मकाम) रहीं. गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ. राजेश कुमारी (राष्ट्रीय अध्यक्षशिक्षा मंच एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मकाम ने की.

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अधूरी बात, अधूरा जीवन…

शारीरिक बीमारियों का इलाज तो हम कर लेते हैं लेकिन वह बीमारियां जो दिमाग के अंदर ही अंदर पनपतीं रहती हैं, किसी को दिखाई नहीं देती है, सही समय पर उनको पहचान कर, स्वीकार करना और इलाज ना किया जाए तो उनका रूप किस कदर बिगड़ेगा …..
विवेक की मानसिक स्थिति दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही थी ।‌ मां को लेकर वह असुरक्षित महसूस करता था । अपनी बात ना मां को ना किसी और को समझा पाया ।
मां उसकी इस बीमारी को समझ तो रही थी लेकिन इससे पहले कि वह इलाज ढूंढती …..

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निशी और विनित परिणय सूत्र में बंधे

महिदपुर रोड के प्रतिष्ठित स्व. बापूलालजी कोचर एवं स्व. सजनबाई कोचर की पोत्री तथा श्री जितेंद्र कुमार कोचर (मावावाला) और श्रीमती अलका कोचर की पुत्री चि. सौ. कुमारी निशी कोचर का शुभविवाह शिवगढ़ (रतलाम) के सुप्रसिद्ध स्व. कालूरामजी एवं स्व. प्रेमकुंवरजी तांतेड़ के पौत्र तथा शाह श्री भूपेंद्रकुमार तांतेड़ और श्रीमती रेनुका तांतेड़ के सुपुत्र चि. विनीत तांतेड़ के साथ धूमधाम से सम्पन्न हुआ।

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सिंहस्थ 2028: उज्जैन में माइक्रो-लेवल प्लानिंग

उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ माइक्रो-लेवल प्लानिंग के साथ तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। 4 नवंबर 2025 को मीडिया संवाद सत्र में पत्रकारों ने प्रोजेक्ट्स की गति देखकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सराहना की। संभागायुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन सिंह ने शिप्रा जल संरक्षण और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रमुख कार्यों की प्रेज़ेंटेशन दी।
₹614.3 करोड़ का सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी प्रोजेक्ट शिप्रा को सालभर प्रवाहमान रखने की तैयारी में है और 2027 मानसून तक इसका परीक्षण प्रस्तावित है। वहीं ₹919 करोड़ की कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट योजना शिप्रा में गंदा पानी मिलने को पूरी तरह रोक देगी। सिंहस्थ के लिए 29 किमी घाट, नया फोरलेन MR-22 और 19 नए पुल तेजी से बन रहे हैं।

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साधु वेश में लूटपाट करने वाला गिरोह धराया

उज्जैन पुलिस ने हाईवे पर यात्रियों को साधु वेश में निशाना बनाने वाले एक अंतर-राज्यीय गिरोह को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। मंगलवार 11 नवंबर 2025 को साधु के वेश में घूम रहे इस गिरोह ने एक दंपत्ति से मारपीट कर लूटपाट की थी, जिसके मात्र कुछ घंटों बाद ही पुलिस ने 7 आरोपियों को चेकिंग पॉइंट पर धर दबोचा।

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क्या इंसानों के पास है सेवन्थ सेंस

-विज्ञान की सबसे कूल खोज, जो स्पर्श को नया अर्थ देती है सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज अब तक हम सिर्फ सिक्स्थ सेंस के बारे में ही जानते थे जो अदृश्य रूप से हमें संभावित घटना के बारे में आगाह कर देती थी.. आप सिक्स्थ सेंस से कुछ ऐसा महसूस कर सकते थे जो…

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आख़िर में…

ज़िंदगी भर मुखौटे पहनती रही. अच्छी बीवी”, “अच्छी बहू”, “बेबस मां” के।
नींद हमेशा अधूरी रही, काम हमेशा पूरे हुए।
जब आख़िरकार सुकून की नींद मिली, तब भी किसी ने झिंझोड़ कर जगा दिया।अब तो मैं बस यही कहना चाहती हूं . “मुझे अब तो सोने दो… अब कोई मुखौटा नहीं, कोई फ़र्ज़ नहीं. बस नींद।”

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पुनर्जन्म…

बस से मसूरी की यात्रा पर निकली साक्षी अपने परिवार के साथ मंदिर पहुँचती है। जैसे ही वह मंदिर के अहाते में कदम रखती है, एक बूढ़ा व्यक्ति उसे देखकर दौड़ा चला आता है और कहता है — “बिटिया, तू आ गई! मैं तेरा इंतज़ार कर रहा था।”
सब हैरान रह जाते हैं। बूढ़ा एक पुरानी तस्वीर दिखाता है . उसमें साक्षी जैसी ही एक लड़की थी, नाम लिखा था “नूरी”। बूढ़े की आँखों में आँसू हैं, और साक्षी के मन में एक अनजाना कंपन।
क्या यह महज़ संयोग है, या सचमुच किसी पुनर्जन्म की कहानी शुरू हो चुकी है?

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