
हाँ, मानवता है नाम मेरा,
सच्चाई से है काम मेरा।
मानवता से सब जीते हैं,
इस अमृत को सब पीते हैं।
मैं तो भरपूर ख़ज़ाना हूँ,
खुशियों का ताना-बाना हूँ।
लेकिन अब लाज है ख़तरे में,
मानवता आज है ख़तरे में।
मुझको सबने बदनाम किया,
यूँ मेरा काम तमाम किया।
कुछ हैं कठोर मन के इंसान,
समझे हैं सब होगा आसान।
मन से भी मुझे निकाल दिया,
टूटी चौखट पे डाल दिया।
अब कोई न खेवनहार रहा,
मुझसे न किसी को प्यार रहा।
लेकिन कुछ लोग भले निकले,
जो आग में तपकर जले निकले।
मानवता के वे पुजारी हैं,
हम भी उनके बलिहारी हैं।
मैं आज भी उनके मन में हूँ,
उनके हर एक भजन में हूँ।
हर दुःख में मेरे साथ हैं वो,
हाँ, मेरे दिन और रात हैं वो।
उनके निर्भीक क़दम से है,
मानवता उनके दम से है।
मानवता जब मर जाएगी,
तो दुनिया ख़त्म हो जाएगी।

बहुत ख़ूब 👌👌
Beautiful and meaningful lines. Well penned.