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सड़क पर घायल व्यक्ति की मदद करता हुआ संवेदनशील इंसान

मानवता..

यह कविता मानवता को एक जीवंत स्वर में प्रस्तुत करती है—जो कभी समाज की आत्मा थी, आज उपेक्षा और कठोरता के बीच संघर्ष कर रही है। फिर भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी मानवता को अपने कर्म, साहस और संवेदना से जीवित रखे हुए हैं। यह रचना पाठक को याद दिलाती है कि मानवता के बिना संसार का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।

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भरोसे की जिंदगी

भरोसा जीवन की वह डोर है, जो हमें स्वयं से लेकर दूसरों और अंततः ईश्वर तक जोड़ती है। विपरीत परिस्थितियों में जब अपने प्रयास नाकाफी पड़ जाएँ, तब किसी अपरिचित का बढ़ा हुआ हाथ ईश्वर जैसा लगता है। जीवन की यह राह आपसी विश्वास पर ही चलती है और अंत में भरोसा यही कहता है, “जो भी होगा, अच्छा ही होगा।”

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