
पिंकी खुराना, वरिष्ठ लेखिका, चंडीगढ़
वह बहुत खुश थी, राहुल अवस्थी से उसकी मुलाकात जो हो गई थी। मीना दलित युवती थी,पर उसने कभी भी आरक्षण का सहारा नहीं लिया, सिर्फ अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़ी थी।
लेकिन वो कहीं भी जाती उसे यही ताना सुनना पड़ता था,” अरे भई तुम लोगों की तो चांदी है, तुम्हें मेहनत करने की क्या जरूरत है” यह बात सुनकर वो कुढ जाती थी इसलिए उसने ठान लिया था कि लोग कुछ भी कहें, मुझे अपनी मेहनत के सहारे आगे बढ़ना है।
हुआ भी यही,वो हर कक्षा में प्रथम आती गई और विश्वविद्यालय में भी प्रथम आई। उसको राहुल अवस्थी के निर्देशन में शोध करना था। राहुल अपने क्षेत्र में बहुत प्रसिद्ध थे,वो एक प्रगतिशील, सुदर्शन युवा प्राध्यापक थे, जिनके साथ काम करना हर किसी के लिए गर्व की बात थी। उन्होंने स्वयं मीना का नाम सुझाया है,यह सुनकर तो मीना के पांव जमीन पर नहीं पड़ रहें थे।
शोध चलता रहा, राहुल और मीना क़रीब आते रहे और एक दिन मीना के ना ना करते भी दोनों के बीच सारी दीवारें टूट गई।
तीन साल तक सब चलता रहा।
” मैं तुम्हें अपनी जान से भी ज्यादा चाहता हूं” एक दिन राहुल ने उसे अपने अंक से लगाते हुए कहा,” अब मैं तुम्हारे बगैर नहीं रह सकता”
” तो हम शादी कर लेते हैं” मीना एक सुखद स्वप्न देखने लगी थी।
” शादी” राहुल को जैसे बिच्छू ने डंक मार दिया हो,” इस बारे में तो मैंने कभी सोचा ही नहीं”
” तो अब सोच लो ना” मीना ने कहा।
“हां अब तो सोचना ही पड़ेगा, प्यार जो करने लगा हुं तुमसे” राहुल ने उसके होंठों को चूमते हुए कहा।
सिलसिला जारी रहा।
राहुल का प्यार कम हो रहा था।
वो चाह कर भी अपने आप को राहुल से दूर नहीं कर सकी।वो प्यार करने लगी थी और एक उज्जवल भविष्य के सपने देखने लगी थी।
” राहुल,मेरा शोध पूरा हो गया है,अब क्या करुं” उसने एक प्रेयसी की तरह पूछा।
” क्या करूं,वापस अपने शहर जाओ और अपनी जात बिरादरी में शादी कर लो, “
” क्या मतलब,मैं कैसे किसी और से ब्याह कर सकती हुं” उसने पूछा था।
“छोटी जात के लोग इतने सिद्धांतो वाले कब से होने लगे।”
” क्या”उसकी पीठ पर एक कोड़ा पड़ा।
” हां मेरी शादी भी अपनी बिरादरी में पक्की हो गई है, और तुम्हारी जाति बिरादरी में यह सब कुछ तो होता रहता है, शारीरिक संबंध तो आम होते हैं, हां हम जैसे खानदानी लोगों के लिए यह सब मुश्किल है, वैसे तुम्हारा धन्यवाद, तुमने मुझे दांपत्य जीवन के योग्य बना दिया, पहले मैं शंकित था अपने प्रति,इस मामले में तुम मेरी गुरु हो,वह कुटिलता से मुस्कुराया” और वहां से चला गया
मीना ठगी सी खड़ी रही। ऐसा लग रहा था उसकी पीठ नंगी है और धड़ाधड़ उसकी पीठ पर कोड़े पड़ रहें है।
पिंकी जी, आपकी कहानी पढ़ना,और उसको सोचना…..ओह ….. कैसे समाज में जी रहे हैं हम ।
ऐसा ही है हमारा समाज
Wah kya khubsurati se apne sacchai ko nanga kiya hai .Arora such me badhai ke patr hai
Pinky ji aapne haqikat ka vernan kiya hai ye sab hamre samaj mai ho raha hai her insan ak jaisa nh hota ye sab truth hai
Aap ki story main humere samaj ka ek katu satya darsha pragat karti hai…bohut badiya story
bahut khubsurati se aaj ke samaj ka chitran kiya he aap
badhi ji patre he
Bahut sunder kahani,
Abhi bhi log jat pat mein yakin rakhte he aur ye katu satay he