मेहनत और सफलता

हेमा जोशी ‘स्वाति, लोहाघाट, उत्तराखंड

जीवन में जो मेहनत करते,
सदा सफलता वही पाते।
कठिन परिश्रम और लगन से,
ऊँचाई पर चढ़ जाते।

अविरल चलती चींटी देखो,
पर्वत पार उतर जाती है।
अलसाई हिरनी अपने ही,
घर में बैठी रह जाती है।

इक कुम्हार जो मेहनत करता,
पीट-पीट माटी ले आता।
देकर आकार उसे फिर वह,
मेहनत का फल तभी है पाता।

गाय पालती, भैंस पालती,
घर की माई मेहनत करती।
चक्की जैसी पिसती रहती,
बच्चों का पोषण तब करती।

एक पिता जो मेहनत करता,
कई ताप वह सहता रहता।
परिवार पालने की ख़ातिर,
सीमाओं में खड़ा है रहता।

मेहनत कर किसान रात-दिन,
तभी अन्न उपजाते हैं।
तरकारी अरु दूध-दही दे,
हम तक वो पहुँचाते हैं।

इक मेहनती मज़दूर जो करता,
बड़े-बड़े भवन बनाता।
अपने घर-परिवार की ख़ातिर,
लगन से कर्म निभाता।

इक मेहनती बच्चे हैं करते,
चैन की नींद कभी न सोते।
लक्ष्य साधकर पढ़ते रहते,
तभी सफल जीवन में होते।

कहे स्वाति भाई-बहनों से,
सभी समझ लो बात हमारी।
मिले सफलता मेहनत से ही,
जीत तभी होगी तुम्हारी।

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