लेखिका मधु चौधरी से एक्सक्लुसिव इंटरव्यू में कहा-उम्र नहीं, हौसला तय करता है रफ्तार की दिशा

साक्षात्कार-मधु चौधरी, बोरीवली (मुंबई)
आज आपकी मुलाकात हम श्रीमती विजया निमला (बीए.एलएलबी), आयु 57 वर्ष, से करा रहे हैं वह एक होममेकर हैं तथा दो वयस्क बच्चों (27 और 24 वर्ष) की माँ हैं. विजया जी को फैशन डिजाइनिंग का 25 वर्षों का अनुभव है . पिछले 13 वर्षों से वह मैराथन में हिस्सा ले रही हैं इसके साथ ही, वह रोटरी क्लब की एक समर्पित सदस्य हैं,इसके अतिरिक्त, विजया पिछले दो वर्षों से अपनी सोसाइटी की सेक्रेटरी के पद का कार्यभार बहुत ही कुशलता से संभाल रही हैं. इन सभी भूमिकाओं को निभाते हुए उन्होंने अनेक शारीरिक चुनौतियों का सामना किया है. स्लिप डिस्क, टेनिस एल्बो, शिन बोन फ्रैक्चर, वर्टिगो एवं आनुवांशिक ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी समस्याओं से गुजरते हुए भी वह लगातार आगे बढ़ती रही हैं.
विजया इन कठिनाइयों को अवसर मानती हैं स्वयं को और अधिक मजबूत बनाने का एक माध्यम विजया के लिए रनिंग सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि ज़िंदगी का रूपक है . उनका मानना है कि किसी भी रेस में शुरुआती लाइन पर खड़ा होना एक उपलब्धि है, किंतु फिनिश लाइन पर पहुँचना आपको सिखाता है और तैयार करता है. ज़िंदगी की सभी चुनौतियों के लिए वह अत्यंत क्रिएटिव, समर्पित एथलीट और कम्युनिटी सर्विस में सक्रिय हैं . अपने आसपास के सभी लोगों को हमेशा प्रोत्साहित करती हैं नई चुनौतियों को स्वीकार करने, अपने पैशन को फॉलो करने और आगे बढ़ने का हौसला देती हैं. विजया अपनी हर छोटी-बड़ी उपलब्धि का जश्न मनाने में विश्वास रखती हैं.
उनके पति राजेंद्र निमला (सीए, एलएलबी ) अपनी सीए प्रैक्टिस करते हैं उन्होंने वर्ष 2013 से रनिंग शुरू की, और आज वह एक अल्ट्रा रनर हैं . दोनों ने साथ मिलकर पूरे भारत में अनेक रेसों में भाग लिया है और विभिन्न आयु-वर्ग श्रेणियों में अनेक पुरस्कार जीते हैं. ये दोनों न केवल एक-दूसरे को प्रेरित करते हैं बल्कि अपने आसपास के सभी लोगों में भी फिटनेस और सकारात्मकता की ऊर्जा भरते हैं. उनके दोनों बच्चे भी इन्हीं की तरह फिटनेस के प्रति समर्पित हैं. पिछले 10 वर्षों से वे क्रॉसफिट ट्रेनिंग और वेटलिफ्टिंग में निष्ठा से लगे हुए हैं .
वीकेश का पर्सनल रिकॉड स्क्वाट में 170 किलोग्राम और डेडलिफ्ट में 185 किलोग्राम है.धृति का स्क्वाट 110 किलोग्राम और डेडलिफ्ट 130 किलोग्राम है. हाल ही में दोनों ने रनिंग भी शुरू की है. धृति ने वर्ल्ड-क्लास फिटनेस इवेंट HYROX में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है. इस पूरे परिवार ने अपनी पहली सामूहिक रेस 10 किलोमीटर की सितंबर में और 21 किलोमीटर की हाफ मैराथन अक्टूबर में सफलतापूर्वक पूरी की. विजयाजी से लाइव वॉयर न्यूज के लिए मधु चौधरी ने बातचीत की. प्रस्तुत हैं उनकी बातचीत के प्रमुख अंशः

मधु चौधरी-सबसे पहले विजया जी, हमें यह बताइए कि आपने अपनी फिटनेस जर्नी कब और कैसे शुरू की?
विजयाजी- मैंने अपनी फिटनेस जर्नी साल 2012 से शुरू की.
मुख्य कारण यह था कि मेरा वजन लगभग 80 किलोग्राम हो गया था, जिसके कारण 2830 साल की उम्र में ही मुझे घुटनों में दर्द रहने लगा था. डॉक्टर ने बताया कि यह आर्थराइटिस (गठिया) की शुरुआत है, और अगर इसे बढ़ने से रोकना है, तो आपको वजन कम करना होगा और एक्सरसाइज़ करनी पड़ेगी. मैंने अपने पापा को 7 साल तक बिस्तर पर देखा और अपनी मम्मी को रूमेटॉइड आर्थराइटिस की वजह से बहुत दर्द और तकलीफ झेलते हुए देखा. मेरे ससुर बहुत समय तक बिस्तर पर रहे, मेरी सास ओवरवेट थीं और कार्डियक अरेस्ट से उनकी मृत्यु हुई. इन सब चीज़ों ने मेरे लिए एक चेतावनी का काम किया. मैंने सोचा अगर मैं अभी से अपने शरीर और स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखूंगी, तो मुझे भी वही समस्याएँ झेलनी पड़ेंगी. मैंने यह भी महसूस किया कि अगर मैं स्वयं स्वस्थ नहीं रहूंगी, तो मैं अपने परिवार के बुज़ुर्गों और बच्चों का ध्यान कैसे रख पाऊंगी.
इसी सोच के साथ मैंने फिटनेस को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना लिया.

मधु चौधरी-जब आपने अपनी जर्नी शुरू करने का निर्णय लिया, तब आपके परिवार की क्या प्रतिक्रिया थी?
विजयाजी-जब मैंने राजा को बताया कि योगा और जिम मैंने ट्राई किया है, पर अब मैं रनिंग करना चाहती हूं और मैंने डॉक्टर से भी इस बारे में बात की है.डॉक्टर का कहना था कि धीरे-धीरे, थोड़ा-थोड़ा करके मैं सब कुछ शुरू कर सकती हूं. तब राजा ने मुझे बहुत सहयोग दिया.वह सुबह-सुबह खुद मुझे छोड़ने जाते थे. मैं बच्चों का टि़िफन तैयार करके सुबह 6:00 बजे घर से निकलती थी, और मेरे जाने के बाद राजा बच्चों को स्कूल समय पर पहुंचाने और बाकी सब चीज़ों का ध्यान रखते थे. बच्चे वैसे भी बहुत छोटे नहीं थे धृति 8वीं में थी और वीकेश 11वीं में. इस तरह परिवार का पूरा सहयोग मुझे उस समय से मिलता रहा है.

मधु चौधरी-इस जर्नी में शारीरिक और मानसिक तौर पर कौन-कौन सी चुनौतियाँ आपके सामने आईं?
विजयाजी-ऐसे तो कई बार फिजिकल इंजरी के चलते मैं तनाव में आ जाती थी, पर जब मेरी (पिंडली की हड्डी) में फ्रैक्चर हुआ, तो वह मेरी जर्नी का सबसे कठिन समय था. मेरी टिबिया में छोटे-छोटे कट बढ़ते-बढ़ते इतने बड़े हो गए कि डॉक्टर ने कहा इतना बड़ा कट उन्होंने आज तक नहीं देखा, क्योंकि आमतौर पर जब दर्द शुरू होता है तो लोग तुरंत इलाज करा लेते हैं.दरअसल, जब आप वर्कआउट करते हैं, तो आपके अंदर जो हार्मोन रिलीज़ होते हैं और शरीर में जो गर्मी उत्पन्न होती है, उसके कारण दर्द महसूस नहीं होता या दर्द सहने की क्षमता बढ़ जाती है.

मधु चौधरी–फिटनेस की जर्नी में सबसे बड़ी चुनौती क्या होती है?
विजयाजी- फिटनेस की जर्नी में सबसे बड़ी चुनौती होती है अनुशासन की.दूसरी अपने शरीर को समझने की.हर व्यक्ति के शरीर की बनावट अलग होती है, उसकी क्षमता भी अलग होती है. सबसे अहम होता है यह जानना कि आपकी सीमा कहाँ तक है और आपको कहाँ रुकना है. ट्रेनर आपको बहुत हद तक मोटिवेट करेगा कि आप यह भी कर सकते हैं, वह भी कर सकते हैं.लेकिन यह आपको स्वयं तय करना होता है कि आप कहाँ तक जा सकते हैं और कहाँ रुकना चाहिए. जैसे-जैसे आप इस जर्नी में आगे बढ़ते हैं, अनुभव और समझ दोनों बढ़ते हैं, और वही हर चुनौती को पार करने में मदद करते हैं.
मधु चौधरी- मधु चौधरी- आप इतनी सारी चीजें कैसे कर पाती हैं और अपना टाइम कैसे मैनेज करती हैं?

विजयाजी- कभी-कभी मुझे बहुत चिड़चिड़ापन होता है, जब सब कुछ एक साथ आता है.पर पिछले दो साल से सोसाइटी के काम का प्रेशर सबसे ज़्यादा रहा है. हालाँकि एक अच्छी टीम के साथ काम करने में अच्छा लगता है और बहुत कुछ सीखने को भी मिलता है, लेकिन कभी-कभी नकारात्मक भावना आने लगती है कि मैं यह सब क्यों कर रही हूं?. फिर खुद को याद दिलाती हूं कि किसी भी काम में मुश्किलें आना स्वाभाविक है. मैं अपनी ज़िम्मेदारी पूरी व़फादारी के साथ निभाने की कोशिश करती हूं. मेरी डिज़ाइनिंग का काम मेरा शौक है, उसमें मुझे मज़ा आता है. घर में मेरे बच्चों और पति का पूरा सहयोग मिलता है. फिटनेस रूटीन के बारे में मैं एक बात कहूंगी मुश्किल सिर्फ एक बार घर से बाहर कदम रखने में ही होती है.
मधु चौधरी-आपके बेटे वीकेश और बेटी धृति ने अपनी फिटनेस जर्नी की शुरुआत कैसे की?
विजयाजी-धृति ने लगभग 16 साल की उम्र में जिम जॉइन किया था, और आज वह इसमें काफी आगे निकल चुकी है. कुछ समय पहले उसने इंस्टाग्राम पर अपनी रील पोस्ट करना शुरू किया, जिसके बाद उसे बड़ी-बड़ी कंपनियों से ऑफर आने लगे.
अब वह पूमा, मसलब्लेज आदि कई कंपनियों के साथ काम कर रही है. अंडरआर्मर,ने तो धृति को अपना ब्रांड एंबेसडर बनने का ऑफर दिया है. वह एक प्रोडक्ट डिज़ाइनर है और फुल-टाइम जॉब करती है.इसके साथ ही उसने भरतनाट्यम सीखा है, और वह गिटार व बांसुरी भी बजाती है.एक समय था जब वीकेश का वजन 130 किलोग्राम था, और आज उसका वजन 80 किलोग्राम है.उसने यह सफर कुछ देर से शुरू किया, लेकिन अब वह उसमें बहुत आगे बढ़ चुका है. वह एक क्वालिफाइड सीएफए है और एक अच्छी कंपनी में कार्यरत है.
मधु चौधरी-आप बाकी सभी लोगों को अपनी तरफ से क्या संदेश देना चाहेंगी?
विजयाजी– मैं सभी लोगों से कहना चाहूंगी कि जब भी हम कोई नया काम शुरू करते हैं चाहे वह छोटा हो या बड़ा हर काम में मुश्किलें आना स्वाभाविक है.शुरुआत में हर काम कठिन लगता है, लेकिन जब हम उस मुश्किल को चुनौती मानकर स्वीकार करते हैं,तो वह मुश्किल रह ही नहीं जाती.हर कठिनाई हमें तैयार करती है नई चुनौतियों का सामना करने के लिए.जब आप एक चुनौती को स्वीकार कर आगे बढ़ते हैं, तो आप स्वयं को और अधिक सक्षम बनाते हैं. हम जब भी कोई रेस शुरू करते हैं चाहे वह 10 किलोमीटर हो, 21 किलोमीटर या 50 किलोमीटर हर रेस में एक मुकाम आता है जहाँ आपका हौसला टूटने लगता है.पर वही पल होता है जो तय करता है कि आप रुकेंगे या आगे बढ़ेंगे .
मधु चौधरी- राजा जी की फिटनेस जर्नी की शुरुआत कैसे हुई?
विजयाजी-राजा ने मेरी रनिंग शुरू होने के लगभग एक साल बाद रनिंग शुरू की.तब से हम दोनों ही साथ में दौड़ रहे हैं.उन्होंने मुझे बाद में शुरू करके भी आज मुझसे कहीं आगे बढ़ चुके हैं,और अब वह एक अल्ट्रा रनर हैं.हम दोनों एक-दूसरे को निरंतर प्रोत्साहित करते रहते हैं.
मधु चौधरी- अंत में आपको यह कहना चाहती हूं कि विजया निमला का जीवन इस बात का प्रमाण है कि उम्र, जिम्मेदारियां या परिस्थितियां कोई भी चीज़ उस व्यक्ति को नहीं रोक सकती जो खुद से वादा कर ले कि मैं हार नहीं मानूंगी. उनकी कहानी हमें सिखाती है कि हर फिनिश लाइन, एक नई शुरुआत होती है.
Very much inspirational interview… मधु इसी तरह interview लेते रहे और समाज को प्रेरणादायक लोगों से मिलवाते रहे।
धन्यवाद आपकी प्रतिक्रिया के लिए
मधुजी एक प्रतिभाशाली लेखिका हैं, उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे बेहद ही प्रभावशाली होते हैं. सामाजिक मुद्दों पर उनकी कलम की धार और भी पैनी हो जाती है. आप उनकी सभी रचनाओं का अवश्य पढ़ें और अपनी प्रतिक्रिया दें.
– संपादक(लाइव वॉयर न्यूज)
धन्यवाद आपकी प्रतिक्रिया के लिए
मधुजी एक प्रतिभाशाली लेखिका हैं, उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे बेहद ही प्रभावशाली होते हैं. सामाजिक मुद्दों पर उनकी कलम की धार और भी पैनी हो जाती है. आप उनकी सभी रचनाओं का अवश्य पढ़ें और अपनी प्रतिक्रिया दें.
– संपादक(लाइव वॉयर न्यूज)
Congratulations!!
Great achievement!
Inspiring life story….
Bahut hi prernadayak interview Madhu aapne liya, Vijaya ki helth ke parti sangta bahut se logo ko motivate karegi.
धन्यवाद आपकी प्रतिक्रिया के लिए
मधुजी एक प्रतिभाशाली लेखिका हैं, उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे बेहद ही प्रभावशाली होते हैं. सामाजिक मुद्दों पर उनकी कलम की धार और भी पैनी हो जाती है. आप उनकी सभी रचनाओं का अवश्य पढ़ें और अपनी प्रतिक्रिया दें.
– संपादक(लाइव वॉयर न्यूज)
संपादक जी आपके मार्गदर्शन के बिना यह संभव नहीं होता। आशा है कि आगे भी आपका सहयोग इसी तरह मिलता रहेगा। आप का आभार।
मधु जी को बहुत-बहुत बधाई। इस प्रेरणा दायक साक्षात्कार के लिए। आप ऐसे ही प्रतिभाशाली लोगों से मिलते रहें और हमें भी प्रेरणा देते रहें।
Salute to both of you — Madhu, as a wonderful writer, and Vijaya, as a true role model. Having known you both for so many years, I can truly say that everything Madhu has written is absolutely right and beautifully expressed. I’ve also seen the positive changes in Vijaya — she’s truly admirable, calm, and graceful. Both of you will always remain role models for us. My best wishes for your future!
धन्यवाद आपकी प्रतिक्रिया के लिए
मधुजी एक प्रतिभाशाली लेखिका हैं, उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे बेहद ही प्रभावशाली होते हैं. सामाजिक मुद्दों पर उनकी कलम की धार और भी पैनी हो जाती है. आप उनकी सभी रचनाओं का अवश्य पढ़ें और अपनी प्रतिक्रिया दें.
– संपादक(लाइव वॉयर न्यूज)
Very well written and so inspiring.
Vijaya aur Madhu aap dono ko dil se salaam. Aap dono ne umr ke us mod par aa kar apni apni jindagi ki disha ko palta jahan par aa kar baaki sab log thak haal kar baith jaate hain kuch naya karne ki to door sochte bhi nahi hai.
Aapke dono ke is jasbe aur mehnat ko mera dil se salaam hai.
आप सभी का शुक्रिया दोस्तों।
Great achievement, heartiest congratulations & very inspirational 👍
अदभुत 🙏