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विजया निमला: ज़िंदगी की हर दौड़ में विजेता

57 वर्षीय विजया निमला के लिए रनिंग सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि ज़िंदगी का रूपक है। स्लिप डिस्क, फ्रैक्चर और ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी शारीरिक चुनौतियों को उन्होंने कभी अपनी मंज़िल के बीच नहीं आने दिया। फैशन डिज़ाइनिंग, पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ, समाजसेवा और फिटनेस — इन सभी को सहजता से संतुलित करते हुए उन्होंने यह साबित किया है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। अपने पति राजेंद्र निमला और फिटनेस-प्रेमी बच्चों के साथ उन्होंने जीवन की हर दौड़ में जीत हासिल की है और हर फिनिश लाइन को एक नई शुरुआत में बदल दिया है।

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आराधना – जो हर बार टूटी, फिर भी हर बार लौटी

शराब सिर्फ नशा नहीं, एक ज़हर है – जो रिश्तों को अंदर से खोखला कर देता है। आराधना की कहानी किसी फिल्म से नहीं, हमारे ही समाज से निकली सच्चाई है – जहां एक पत्नी अपने शराबी पति की मार, अपमान और बेवफाई को सालों झेलती रही, सिर्फ इसलिए कि शायद अगली बार सब ठीक हो जाएगा। लेकिन कभी नहीं हुआ। फिर भी वह लौटी… क्योंकि औरतें सिर्फ माफ नहीं करतीं, वो हर बार खुद को जोड़ती हैं – खामोशी से, टूटते हुए।

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