शिव शक्ति

संध्या दीक्षित

शिव ही सत्य हैं और सत्य ही शिव हैं। शिव ही सुंदर हैं। सत्यम शिवम सुंदरम ही आदियोगी शिव की पहचान है।
शिव ही शक्ति हैं शक्ति ही शिव हैं। यह दोनो ही एक माला के वे अनमोल मोती हैं जिन की आभा से सम्पूर्ण विश्व शोभायमान होता है। परमपिता ब्रह्मा जी ने शिव जी की प्रेरणा से ही इस ब्रह्मांड की रचना की है। शेषशायी भगवान विष्णु जी को इस सृष्टि के पालन-पोषण का दायित्व भी शिव जी ने ही प्रदान किया है। सृष्टि की लयात्मकता अगर विष्णु जी के हाथ में है तब संहार की कमान स्वयम् शिव जी के हाथ  में है। सृष्टि की उत्पत्ति के विषय में यही सत्य है। परन्तु सदाशिव का प्राकट्य कैसे हुआ हमारे शास्त्रों में इस का कोई भी प्रमाण नहीं मिलता है। वास्तव में शिव अनादि अनन्त हैं और त्रिकाल दर्शी भी हैं। सबसे बड़े प्रशासक और प्रबन्धक हैं सदाशिव अर्थात सबसे बड़े मैनेजमेंट गुरू जो सब को उनके उत्तरदायित्व देता है और सबके कार्य भार पर सतर्क और प्रशंसनीय दृष्टि भी रखता है। समय-समय पर समीक्षक बन कर और कभी तिर्यक दृष्टि से देखकर सबकी सहायतार्थ तत्पर भी रहता है । वास्तव में शिव शंकर के महात्म्य पर दृष्टि दर्शन असम्भव है वे तो शब्दातीत हैं, अवर्णनीय हैं और उन की महिमा अपरम्पार है । अंततः यही स्मरणीय रखना चाहिए कि ” सेव्यः सेव्यः सदा शंकरः सर्व दुःखहा।”

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